इस बीच प्रसव का कार्य जारी रहा। आपात स्थिति में आने वाले मरीजों को कर्मचारी मोबाइल टार्च और मोमबत्ती की रोशनी में प्रसव करा रही हैं। कई दिनों से यह स्थिति बने होने के बाद भी जिम्मेदार समस्या से बेखबर बने हुए हैं, जबकि कर्मचारियों की ओर से लगातार उन्हें सूचना दी जा रही है। मरीजों के तीमारदार भी उनसे शिकायत कर चुके हैं, लेकिन बजट का अभाव बताकर हाथ खड़े कर देते हैं।
केंद्र पर तैनात स्टाफ नर्स विजय लक्ष्मी ने बताया कि रोजाना 4 से 5 प्रसव होता है। दिन में तो कोई दिक्कत नहीं होती, लेकिन रात में बिजली न होने पर मोमबत्ती या मोबाइल टार्च का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बारे में प्रभारी चिकित्साधिकारी केकराहीं और सीएमओ को अवगत कराया जा चुका है।
कई बार पत्र देने के बाद भी समस्या का हल नहीं हुआ है। इस बाबत प्रभारी चिकित्साधिकारी केकराहीं डॉ. अवधेश सिंह का कहना था प्रसवोत्तर केंद्र पर बिजली समस्या की जानकारी एक दिन पहले ही मिली है। यहां इलेक्ट्रिशियन भेजकर सुधार कराया जा रहा है।