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नौ थानों में नहीं आया कोई फरियादी, चार थानों में बस एक-एक पहुंचे

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राबर्ट्सगंज कोतवाली में समाधान दिवस में शामिल एसडीएम। - फोटो : SONBHADRA
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सोनभद्र। थानों में शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस में फरियादियों की संख्या कम रही। करीब साढ़े तीन माह बाद लगे थाना समाधान दिवस में जिले के 22 थानों में 51 प्रार्थना पत्र आए। इसमें दस का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। सर्वाधिक 11 मामले घोरावल में आए, जबकि चोपन, शाहगंज, मांची, हाथीनाला, म्योरपुर, पिपरी और महिला थाने पर कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त नहीं हुआ। मामलों के निस्तारण के लिए संबंधितों को सप्ताह भर का समय दिया गया। थानों में सुनवाई के दौरान सर्वाधिक भूूमि से संबंधित प्रकरण पहुंचे थे।
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सदर कोतवाली में सुनवाई कर रहे एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह और सदर एसडीएम राजेश सिंह के समक्ष 12 प्रकरण पहुंचे। इसमें सिर्फ एक का मौके निस्तारण किया गया। धरनीपुर गांव निवासी विनोद ने प्रार्थना पत्र देकर अवगत कराया कि उसने एक व्यक्ति को जमीन लेने के लिए लिए लाखों रुपये दिए हैं, लेकिन अब वह न जमीन दे रहा है और नहीं रुपये वापस करने के लिए तैयार है। राबर्ट्सगंज निवासी सुरेश ने भी एक व्यक्ति पर जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया। एसपी ने मातहतों और राजस्व कर्मियों को मौके पर जाकर मामलों का निस्तारण करने का निर्देश दिया। घोरावल कोतवाली में 11 प्रकरण पहुंचे थे। वहीं बभनी में चार प्रार्थनापत्र प्राप्त हुए सभी का निस्तारण कर दिया गया। दुद्धी में दो प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जो निस्तारित कर दिए गए। थाना विंढमगंज पर एक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ जिसका निस्तारण कर दिया गया । इसके अलावा पन्नूगंज थाने में पांच, रायपुर में चार, रामपुर बरकोनिया में दो, कोन में पांच, ओबरा में एक, जुगैल में एक, बीजपुर में एक, शक्तिनगर में एक प्रार्थनापत्र प्राप्त हुआ।
समाधान दिवस पर पहुंचे बस दो मामले
अनपरा। थाना समाधान दिवस में राजस्व से जुड़े दो मामले पहुंचे। एसडीएम प्रमोद कुमार तिवारी और थाना प्रभारी श्रीकांत राय ने एक मामले का मौके पर निपटारा करा दिया। एनसीएल सीएसआर मद से औड़ी गांव में सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस पर कुछ ग्रामीणों के विरोध से काम को बीच में ही रोकना पड़ा। मौके पर एसडीएम और थाना प्रभारी ने पहुंचकर ग्रामीणों को समझा-बुझाकर कार्य को आगे शुरू कराया। करहियां गांव से आए जमीन विवाद के मामले का निपटारा नहीं हो सका।
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