साहित्यिक सामाजिक संस्था सोन संगम की ओर से पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती की पूर्व संध्या पर बृहस्पतिवार की शाम विचार गोष्ठी एवं काव्य संध्या आयोजित की गई। काव्य संध्या में कवियों की काव्यपाठ किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुरेश्वर प्रसाद मिश्र, आचार्य वनस्पति विज्ञान विवेकानंद इंटर कॉलेज शक्तिनगर रहे। अध्यक्षता गुलाब सिंह ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. बृजेंद्र मिश्रा एवं रविंद्र मिश्रा ने गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से किया। सोन संगम के कार्यकारी अध्यक्ष विजय कुमार दुबे ने कहा कि निराला का व्यक्तित्व संपूर्ण हिंदी साहित्य में अनुकरणीय है। निराला ने कभी भी किसी से समझौता नहीं किया। मुख्य अतिथि सुरेश्वर प्रसाद मिश्र ने कहा की निराला का जीवन अत्यंत कठिनाइयों से परिपूर्ण था, जिसको उनके हिंदी का पहला शोक गीत सरोज स्मृति में देखा जा सकता है। कवियित्री विजय लक्ष्मी सिंह ने फूलों की खुशबू बन बैठूं, महकाऊं तेरे मन को मैं, तुम प्यार से देखो मुझको और मधुमास बन जाऊं मैं सुनाकर प्रेम का महत्व समझाने की कोशिश की। कवि माहिर मिर्जापुर ने हर भारतीय को चाहिए तिरंगे का सम्मान करें। इस मौके पर मुकेश, अवधेश प्रसाद, अक्षय लाल, पूजा साहनी, रामकृष्ण मिश्र, विजय कुमार मिश्र, किरण मिश्रा, मनीष यादव, गीता सिंह आदि उपस्थित रहे।