सोनभद्र। नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए जिले केे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सीआरपीएफ आने वाले समय में भी बनी रहेगी। सांसद पकौड़ी लाल कोल के पत्र पर गृहमंत्री अमित शाह की तरफ से इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक पहल के निर्देश जारी किए गए हैं।
जहां नक्सल उन्मूलन हो गया है, वहां से सीआरपीएफ हटाने की प्रक्रिया चल रही है। इसकी जानकारी होने पर 17 दिसंबर 2019 को सांसद पकौड़ी लाल कोल ने गृहमंत्री को पत्र भेजकर अवगत कराया कि नक्सलियों के सफाए के लिए सोनभद्र और चंदौली में सीआरपीएफ तैनात है। सोनभद्र से सटे छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र हैं। सीमावर्ती इलाकों के घने जंगल, पहाड़ व नदियां पड़ोसी राज्यों में एक समान हैं और आदिवासियों की संस्कृति भी इन राज्यों में एकसमान है। इस नाते विभिन्न प्रकार के सामाजिक, वाणिज्यिक संबंध पड़ोसी प्रांतों के आदिवासियों से है। ऐसे में जिले से सीआरपीएफ चले जाने की स्थिति में नक्सली इसका लाभ उठाकर पुन: सक्रिय होकर घटना को अंजाम दे सकते हैं।
केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती से पूर्व वर्ष 2001 में 40-50 नक्सलियों ने मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र के खोराडीह में पीएसी कैंप पर हमला कर 14 एसएलआर रायफल, एक स्टेगन, 1542 गोली, 32 मैगजीन लूट लिया था। चंदौली के हिनौता घाट में नक्सलियों ने विस्फोट कर जवानों से भरे वाहन को उड़ा दिया था, जिसमें 14 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। जवानों का हथियार लूट कर नक्सली फरार हो गए थे। लेकिन वर्ष 2004 में सीआरपीएफ की तैनाती के बाद नक्सली बड़ी घटनाओं को अंजाम नहीं दे पाए। स्थानीय पुलिस की मदद से सुरक्षाबलों ने कुख्यात नक्सलियों को गिरफ्तार कर किया। वहीं बार्डर पर सुरक्षाबलों के मुस्तैद होने से नक्सलियों ने अपना रूख पड़ोसी राज्यों की ओर कर लिया। सांसद पकौड़ी लाल कोल ने कहा कि गृह मंत्रालय से जिले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल तैनात रहने देने का आश्वासन मिला है।