ओबरा। ओबरा तापीय परियोजना में शनिवार को भी कोयला संकट की स्थिति बनी हुई है। परियोजना की इकाइयों को सुचारु रूप से चलाने के लिए तीन-तीन रैक कोयले की आपूर्ति नियमित होनी चाहिए, मगर अभी दो-दो रैक ही कोयला मिल रहा है। ओबरा परियोजना में चल रही तीनों इकाइयों के लिए स्टॉक से लगभग तीन हजार मैट्रिक टन कोयला प्रतिदिन उठाया जा रहा है। यही स्थिति रही तो तीनों इकाइयों को लगभग आठ दिन तक ही चलाया जा सकता है।
कोयले की कमी से बंद 200 मेगावाट की 12वीं इकाई को भी सोमवार से चलाने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। इस इकाई को चालू करने के बाद कोयला की आपूर्ति नहीं बढ़ी तो आने वाले दिनों में ओबरा परियोजना को कोयला को लेकर भारी संकट से जूझना पड़ सकता है। ओबरा परियोजना की 200 मेगावाट की 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं की चार इकाइयों को एक साथ चलाया गया तो प्रतिदिन लगभग 12 हजार मीट्रिक टन कोयला की आवश्यकता पड़ेगी। इसके लिए कम से कम तीन रैक कोयला प्रतिदिन चाहिए। वहीं, एनसीएल पूरे वर्ष भर के कोयला उत्पादन में लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का दावा करता है। इसके बावजूद उत्पादन निगम को कोयला कम आपूर्ति करने में कहीं न कहीं बकाया रकम को कारण माना जा रहा है। वहीं कुछ जानकार कोयला की कमी को सोची समझी चाल बताते हुए निजीकरण से भी जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल ओबरा परियोजना को कोयला आपूर्ति बढ़ाने के लिए उच्च प्रबंधन लगातार बात कर रहा है। शनिवार को ओबरा परियोजना की 200 मेगावाट की 9वीं इकाई से 158 मेगावाट, 10वीं इकाई से 169 मेगावाट और 11वीं इकाई से 141 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है।