रमजान का मुकद्दस माह रविवार से शुरू होगा। शनिवार की शाम चांद दिखने के साथ ही लोग सहरी और इफ्तार की तैयारियों में जुट गए। बाजार में सहरी व इफ्तार के सामानों की खरीद-फरोख्त के लिए भीड़ से रौनक बढ़ गई। मस्जिदों में तरावीह शुरू हो गई।
दारुल उलूम कादरिया नूरिया अरबी महाविद्यालय बघाडू के संस्थापक हजरत नसीरे मिल्लत ने बताया कि जब रमजान के महीने की पहली रात आती है तो जन्नत के रास्ते खोल दिए जाते हैं, जो इस मुबारक माह की आखिरी रात तक खुले ही रहते हैं।
इस माह की किसी भी रात में नमाज अदा करने वाले शख्स को हर नमाज के बदले 700 नेकियां मिलती हैं। इस महीने में नेकी का कोई काम करने वाले को फर्ज अदा करने जितना सवाब मिलता है। यह सब्र का महीना है और सब्र का बदला जन्नत है। उधर, रमजान का चांद दिखते ही मस्जिदों में तरावीह भी शुरू हो गई।