फ्लोराइड और आयरन युक्त पानी पी रहे लोगों की समस्या पर अमर उजाला में 28 फरवरी को छपी खबर को डीएम गंभीरता से लिया है। जल निगम के अधिकारियों से मामले में पूरी रिपोर्ट तलब की है। पत्र जारी कर उनसे पूछा है कि कितने गांवों में वह पानी पहुंचा रहे हैं और जो इलाके वंचित हैं, वहां कब तक पानी देंगे।
भूजल के प्रदूषित होने के कारण जिले की बड़ी आबादी दूषित पानी पीकर बीमारियों की शिकार हो रही है। शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए शुरू की गई हर घर जल योजना के तहत भी प्रभावित गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा। पाइप लाइन बिछाने और कनेक्शन देने के बाद भी सूखी टोटियों के चलते लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
कोन, म्योरपुर, बभनी, दुद्धी, चोपन ब्लॉकों के करीब 276 गांवों में फ्लोराइड की समस्या है तो नगवां, चतरा, रॉबर्ट्सगंज, घोरावल क्षेत्र के पानी में आयरन की मात्रा मानक से काफी अधिक है।
इसके समाधान के लिए ही जिले में हर घर जल योजना के तहत करीब तीन हजार करोड़ की 12 पेयजल परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। कायदे से इन परियोजनाओं से मार्च 2024 से ही जलापूर्ति शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन कार्यदाई संस्था की लेटलतीफी के चलते अभी भी काम पूरा नहीं हो पाया है।
नतीजा फ्लोराइड प्रभावित गांवों के लोग अब भी दूषित जल पीने को विवश हैं। हालांकि जलनिगम ने दावा किया है कि अमवार और झीलो-बीजपुर को छोड़कर दस परियोजनाएं पूरी कर सभी गांवों में पानी आपूर्ति शुरू कर दी गई है, जबकि हकीकत इससे अलग है।
गर्मी में पानी का संकट गहराने पर स्थिति और गंभीर होगी। इसके मद्देनजर डीएम बद्रीनाथ सिंह ने जलनिगम से सभी परियोजनाओं से पानी आपूर्ति वाले गांवों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है। इसके आधार पर सत्यापन कराकर शुद्ध आपूर्ति की व्यवस्था कराई जाएगी।
हर घर जल योजना के तहत सभी गांवों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति से संतृप्त किया जाना है। जलनिगम से उन सभी गांवों का विवरण तलब किया गया है, जहां पाइप से पानी पहुंच रहा है। इसका सत्यापन भी कराया जाएगा। इसमें किसी भी तरह ही लापरवाही सामने आने पर सख्त कार्रवाई भी होगी। साथ ही सभी ग्रामीणों को शुद्ध जलापूर्ति की व्यवस्था कराई जाएगी।
-बद्रीनाथ सिंह, डीएम।