कोयला परिवहन में लगे सात साल से अधिक पुराने वाहनों को हटाए जाने के विरोध में सोमवार को ऊर्जांचल ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध जताया। डीएम से मिलकर ट्रक मालिकाें ने इस फैसले को अव्यवहारिक बताते हुए वापस लेने की मांग की।
रेणुकूट-अनपरा के बीच लगने वाले जाम से निजात के लिए ओवरलोड राख परिवहन पर नियंत्रण लगाने पर जोर दिया। ट्रक मालिकाें का कहना था कि जाम से निजात के लिए गत 26 अक्तूबर को एनटीपीसी शक्तिनगर के परिसर में पुलिस-प्रशासन व परियोजना के अधिकारियों ने बैठक की थी।
इसके बाद जाम का कारण पुराने वाहनों को बताते हुए गत 30 सितंबर को सात वर्ष की अवधि पूरा कर चुके ट्रक-ट्रेलर से कोयला व राख परिवहन न कराने का निर्देश जारी किया था। यह निर्णय पूरी तरह अव्यवहारिक है।
इससे सैकड़ों ट्रक मालिकों का व्यवसाय चौपट हो जाएगा। जाम की मुख्य वजह पावर परियोजनाओं से राख का ओवरलोड परिवहन और सड़क मार्ग का चौड़ीकरण न करना है। बावजूद मूल समस्या की अनदेखी कर ट्रक मालिकों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
उन्होंने इस फैसले को वापस लेने की मांग की। कहा कि ऐसा न होने पर आंदोलन के लिए विवश होंगे। डीएम बद्रीनाथ सिंह ने कहा कि प्रशासन की मंशा आम लोगों को सहूलियत देना है। परियोजना अधिकारियों से वार्ता के बाद ही यह निर्णय लिया है।
जल्द ही इस संबंध में दोबारा बैठक होगी। इसमें इस मुद्दे को रखा जाएगा। हर संभव समाधान का प्रयास किया। विरोध प्रदर्शन में उपाध्यक्ष हरिशंकर सिंह, मनीष जायसवाल, आनंद कुमार सिंह, गोपाल सिंह, सुशील तिवारी, ओमप्रकाश सिंह, इम्तियाज अली, अनुपम, राजू प्रसाद, जगदीश सिंह, श्याम जीत आदि शामिल रहे।