सोनभद्र। ग्राम पंचायतों को सशक्त और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए जिले में स्थापित पंचायत उद्योग भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं। करीब छह साल पहले जिले में छह स्थानों पर फ्लाई ऐश (बिजली घरों की राख) से ईंट बनाने वाले उद्योग स्थापित किए गए थे। इनमें जिला खनिज फाउंडेशन से 38-38 लाख रुपये का निवेश किया गया था। लगभग छह माह चलने के बाद ही ये उद्योग ठप पड़ गए। लाखों की मशीनें कबाड़ हो रही हैं। जिन पंचायतों को इन उद्योगों के माध्यम से सशक्त बनाना था, उनके अंश की पूंजी भी इसमें डूब गई। हैरानी की बात है कि करोड़ों रुपये से स्थापित इन उद्योगों को अब कोई पूछने वाला भी नहीं है। विभागीय अधिकारी भी इस पर मौन हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से पंचायत उद्योगों की स्थापना की गई थी। ग्रामीणों को प्रशिक्षण देकर इस उद्योग के माध्यम से काम उपलब्ध कराने की मंशा थी। इसके लिए जिले में ईंट उद्योग को चुना गया था। मिट्टी की जगह यहां के पॉवर प्लांटों से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध फ्लाई ऐश की मदद से ईंट बनाने के लिए म्योरपुर, चोपन, रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक में छह स्थानों पर मशीनें स्थापित की गई। जिला खनिज फाउंडेशन से बजट लेकर स्थापित उद्योग से संबंधित पंचायतों को आमदनी का नया जरिया उपलब्ध कराना था। वर्ष 2018-19 में यह उद्योग लगे तो ग्रामीणों में उम्मीद जगी, मगर कुछ माह बाद ही यह बंद पड़ गए। लाखों रुपये में खरीदी गई मशीनों को भी जस का तस छोड़ दिया गया। कुछ जगह कागजों पर यह उद्योग लंबे समय संचालित भी रहा, मगर अब इसे कोई पूछने वाला भी नहीं है। खुद पंचायती राज विभाग के जिम्मेदार भी पंचायत उद्योगों से बेखबर हैं। यह उद्योग कब, कहां और किस हाल में है, इसे पूछने वाला भी कोई नहीं है। इस उद्योग के लिए फंड देने वाले खनिज विभाग के पास भी इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।
इन स्थानों पर लगे थे ईंट बनाने के उद्योग
फ्लाई ऐश से ईंट बनाने वाले उद्योग जिले में छह स्थानों पर स्थापित किए गए थे। चोपन ब्लॉक के पटवध और बर्दिया, रॉबर्ट्सगंज के पकरी और सलखन, म्योरपुर ब्लॉक में कुलडोमरी और खैराही गांव में पंचायत उद्योग के जरिए फ्लाई ऐश ब्रिक्स के प्लांट लगाए थे। प्लांट की स्थापना और स्थल विकास के लिए प्रत्येक जगह 38.52 लाख रुपये की राशि डीएमएफ मद से खर्च की गई थी।
सीएम को करना था उद्घाटन, ऐन वक्त पर बदला कार्यक्रम
पंचायत उद्योग की स्थापना के वक्त से ही गड़बड़ियां हावी रही हैं। वर्ष 2018-19 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोनभद्र आए थे। तब उन्हें पंचायत उद्योग के माध्यम से सलखन में स्थापित फ्लाई ऐश ब्रिक्स प्लांट का शिलान्यास करना था। इसके लिए कई दिन पहले से अफसर तैयारियों में जुटे थे। सारी तैयारी पूरी कर ली गई। कार्यक्रम को सीएम के प्रोटोकॉल में भी शामिल किया गया था। ऐन वक्त पर पता चला कि जिस जमीन पर प्लांट लग रहा है, वह ग्राम समाज के बजाए किसी की निजी जमीन है। उसके बैनामे का तरीका भी विवादित है। आनन-फानन में कार्यक्रम टाल दिया गया। हालांकि इसके बावजूद सभी स्थानों पर निजी जमीन में ही प्लांट स्थापित किया गया। भूमि के बदले स्वामी को किराये के रूप में रकम भी दी गई थी।
...तो कागजों पर चल रहे सोनभद्र के उद्योग
पंचायत राज विभाग ने हाल ही में प्रदेश के बंद पड़े पंचायत उद्योग का विवरण सार्वजनिक किया था। पूरे प्रदेश में स्थापित 95 में से 65 पंचायत उद्योग को बंद होना बताया गया था। इनमें सोनभद्र के किसी पंचायत उद्योग का कोई जिक्र ही नहीं था। इसके बाद से ही चर्चा तेज है कि कहीं इन उद्योगों का संचालन कागजों पर तो नहीं हो रहा।
सभी पंचायत उद्योग मेरे कार्यकाल से पहले के हैं। कोई भी उद्योग वर्तमान में चालू नहीं है। इसके पीछे की वजह क्या है, इसकी जानकारी कराएंगे। फिर उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। -नमिता शरण, जिला पंचायत राज अधिकारी।