ऊर्जांचल में खनन के प्रभाव का आकलन करने पहुंचे टीम के सदस्य।
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उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र (ऊर्जांचल) में अनवरत जारी कोयला खनन से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन शुरू हो गया है। इसका अध्ययन आईआईटी-आईएसएम धनबाद की टीम ने शुरू किया है। टीम के कई सदस्यों ने एनसीएल निगाही कोयला परियोजना के आसपास के क्षेत्रों का सर्वे व डेटा संग्रह शुरू किया है।
देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए एनसीएल को वर्ष 2023-24 तक 130 मिलियन टन उत्पादन करना है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए एनसीएल की मेगा कोयला खदान निगाही की उत्पादन क्षमता के विस्तार की योजना है। निगाही परियोजना के विस्तार के कारण आसपास के लगभग 10 किमी के बफर जोन में पर्यावरण व पारिस्थितिकी तंत्र पर खनन गतिविधियों के प्रभाव का वैज्ञानिक आंकलन करने के लिए आईआईटी-आईएसएम धनबाद की मदद ली जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत, आईआईटी (आईएसएम), धनबाद के पर्यावरण विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के पांच सदस्यों की एक टीम डॉ. गुरदीप सिंह (विभागाध्यक्ष) के निर्देशन में निगाही व इसके आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण के साथ विस्तृत अध्ययन के लिए एक कार्ययोजना पर कार्य कर रही है। इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर कंपनी पर्यावरण व पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतरी व इनकी पुनर्स्थापना की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम करेगी।