जिले के परिषदीय विद्यालयों में लगे हैंडपंपों से फ्लोराइड युक्त पानी आने का मामला गरमाने लगा है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य इं. अशोक यादव ने बीएसए से ऐसे विद्यालयों की सूची तलब की है। वह बच्चों के दूषित पानी का मामला सीएम दरबार पहुंचाएंगे।
ओबरा, राबर्ट्सगंज और दुद्धी तहसील क्षेत्र के नक्सल प्रभावित और दुरूह क्षेत्र में लगे हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त पानी आने की समस्या काफी पूर्व से रही है। जलनिगम को भेजे गए सैंपल की जांच में म्योरपुर, कोन, दुद्धी ब्लाक के कई विद्यालयों में लगे हैंडपंप के पानी में फ्लोराइड की अधिकता पाई गई है। रिपोर्ट के मुुताबिक नवसृजित ब्लॉक कोन के प्राथमिक विद्यालय कुड़वा गांव के स्कूल में मानक 1.5 मिली लीटर से सात गुना ज्यादा 7.79 मिली ग्राम फ्लोराइड मिला है। प्राथमिक विद्यालय गढ़िया में 7.22 मिली ग्राम मिला है। इसी तरह अब तक दो दर्जन से अधिक स्कूलों में लगे हैंडपंपों की जांच करने पर फ्लोराइड की मात्रा अधिक मिली है। फ्लोराइड सबसे पहले बच्चों के दांतों को प्रभावित कर रहा है। इसके बाद यह घुटना कमर और जोड़ वाली हड्डियों को प्रभावित कर दिव्यांग बना देता है। यह मामला पिछले दिनों जिले में दौरे पर आए बाल संरक्षण आयोग के सदस्य इं. अशोक यादव तक पहुंचा था, जिसे उन्होंने गंभीरता से लेते हुए बच्चों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की दिशा में पहल तेज कर दी है। उन्होंने बीएसए से ऐसे स्कूलों की सूची मांगी है जहां के हैंडपंपों में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है।
किन-किन परिषदीय स्कूलों में लगे हैंडपंपों के पानी में फ्लोराइड अधिक मात्रा में निकल रहा है, उसकी रिपोर्ट बीएसए से मांगी गई है। सीएम से मिलकर यह मामला रखा जाएगा। स्कूलों में अध्यनरत बच्चों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का प्रबंध कराने की मांग करेंगे, ताकि बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सकें। - इं. अशोक यादव, सदस्य, बाल संरक्षण आयोग उत्तर प्रदेश