रेणुकूट। कोलकाता से नई दिल्ली तक पदयात्रा पर निकली गीता शर्मा बालाकृष्णन शुक्रवार को रेणुकूट पहुंचीं। पेशे से आर्किटेक्ट 53 वर्षीय गीता आर्किटेक्चर जागरूकता के लिए 1700 किलोमीटर की यह यात्रा कर रही हैं। नगर में उनका जोरदार स्वागत किया गया।
उनके इस सफर का उद्देश्य वास्तुशिल्पी सामाजिक जिम्मेदारी पर प्रकाश डालना है और उन मुद्दों को सामने लाना है जिन्हें अच्छे डिजाइन से हल करते हुए जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक रूप से वास्तुशिल्प और डिजाइन समाज की जरूरतों से बंधे हुए होते हैं जिससे हर जमाने के सामाजिक ताने-बाने का पता चलता है। वक्त गुजरने के साथ पारिस्थितिकीय चुनौतियां और महानगरीय जोखिम सामने आते हैं। इससे वास्तुशिल्प की भूमिका में भी विकास होता है। उनके साथ चार लोगों की एक छोटी टीम भी है, जो उनकी यात्रा का प्रबंधन देखती है। दुद्धी से होते हुए वो 10 मार्च को रेणुकूट पहुंचीं। उन्होंने नगर में लायंस क्लब और अन्य सामाजिक संगठनों से मुलाकात कर अपने यात्रा का उद्देश्य बताया। उन्होंने बताया कि वास्तु जीवन को कैसे प्रभावित करता है। किसी भवन का डिजाइन अलग अलग स्थानों के लिए देशकाल, स्थानीय मौसम, उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अलग-अलग होता है। किसी घर का वास्तु व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित करता है। वास्तुकार किचेन का प्लेटफार्म, लिविंगरूम बाथरूम बनाते समय बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों सभी की सुविधाओं और सुरक्षा का ध्यान रखता है, और कम खर्च में ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध कराता है। वाक फॉर आर्काज अभियान के माध्यम से हम किसी निर्माण श्रमिक या शिल्पकार की कहानी को प्रकाश में लाने का अवसर देते हैं। आर्किटेक्ट गीता ने बताया कि उनकी यह यात्रा, महिंद्रा, टीवीएस, विवेल, टाटा टिस्कॉन, कोहलर के अलावा अन्य कई संस्थाओं के द्वारा प्रायोजित है। वह रेणुकूट से सिंगरौली के लिए निकलीं, जहां से रीवा, पन्ना, खजुराहो, ओरछा, ग्वालियर, भरतपुर, मथुरा होते हुए दिल्ली में राष्ट्रपति भवन पहुंचकर यात्रा समाप्त करेंगी।