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पहले अभिलेख दुरुस्त कराएं, फिर करें कोई र्कारवाई

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प्रीतनगर की जमीन पर स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद में जिला प्रशासन ने रेलवे को न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए अभिलेख दुरुस्त कराने का निर्देश दिया है। व्यापारियों और रेलवे के अधिकारियों के साथ हुई संयुक्त बैठक में एडीएम ने साफ किया है कि अगर तय प्रक्रिया को पूरा किए बिना किसी को नोटिस देकर परेशान किया जाता है तो उत्पन्न कानून व्यवस्था के संकट के लिए रेलवे खुद जिम्मेदार होगा।
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रेलवे की ओर से चोपन स्टेशन के विस्तारीकरण का कार्य कराया जा रहा है। नगर के मुख्य बाजार प्रीतनगर में बसे लोगों को रेलवे की ओर से नोटिस देते हुए जमीन पर अपना स्वामित्व बताते हुए उसे खाली करने को कहा जा रहा है। भूमि पर काबिज लोग अपने पास उपलब्ध दस्तावेज के सहारे भूमि पर अपना दावा प्रस्तुत कर रहे हैं। रेलवे की ओर से बार-बार दिए जा रहे नोटिस से परेशान लोगों ने व्यापार मंडल के बैनर तले राज्यसभा सांसद रामसकल, व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय जैन, भाजपा जिला महामंत्री रामसुंदर निषाद, अधिवक्ता अमित सिंह, सहित अन्य नेताओं के साथ पिछले दिनों डीएम से मिलकर ज्ञापन सौंपा था। डीएम ने एडीएम सहदेव मिश्र को दोनों पक्षों के साथ बैठक कर विवाद का समाधान करने को निर्देशित किया।
एडीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में दोनों पक्षों के लोग मौजूद रहे। रेलवे की ओर से उपस्थित पूर्व मध्य रेलवे चोपन के सहायक मंडल अभियंता ओंकार आशीष और सेक्शन अभियंता चोपन रतन शंकर ने वर्ष 1959 से 1964 तक चोपन में स्थित अधिग्रहित भूमि का नक्शा एवं गजट नोटिफिकेशन दिखाया। रेल अधिकारियों ने स्वीकार किया कि रेलवे की ओर से अभी तक अधिग्रहीत भूमि पर नामांतरण की कार्रवाई पूर्ण रूप से प्रतिपादित नहीं हो पाई है और 1964 के बाद चोपन दो बार सर्वे प्रक्रिया को पूर्ण कर चुका है। इस दौरान स्थानीय लोगों की ओर से सर्वे प्रक्रिया में अधिग्रहित भूमि पर अपना स्वामित्व /खतौनी आदि बनवा ली गई है। कुछ लोग बगैर खतौनी के ही रेलवे की भूमि पर घर मकान आदि बनवा चुके हैं। वहीं व्यापार मंडल का कहना था कि प्रीतनगर के स्थानीय निवासियों के नाम सर्वे प्रक्रिया के दौरान जो अभिलेख/ खतौनी उनके नाम हुए हैं वह सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित सर्वे एजेंसी, सहायक अभिलेख अधिकारी, अभिलेख अधिकारी, सहायक जिला जज के विभिन्न न्यायालयों में विधिवत प्रक्रिया के आधर पर हुआ है। करीब 40 वर्षों से घर मकान बनाकर रह रहे लोगों को अब रेल अधिकारियों की ओर से बिना पत्रांक एवं अराजी नंबरों का उल्लेख किए बिना नोटिस बांटकर परेशान किया जाना उचित नहीं है। एडीएम ने रेल अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभिलेखों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत दुरुस्त कराते हुए ही अग्रिम कार्रवाई अमल में लाई जाए। जब तक इसका निस्तारण नहीं होता, नोटिस निर्गमन व अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई न की जाय।
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