जिले में फ्लोराइड प्रभावित करीब 269 गांवों में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की कवायद तेज हो गई है। वर्षों से खराब रिमूवल प्लांटों के बारे में डीएम ने संबंधित विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। साथ ही वर्षों से खराब रिमूवल प्लांट को चालू कराने का निर्देश दिया है।
जिला प्रशासन की ओर से अब तक दुद्धी, चोपन, म्योरपुर और बभनी ब्लॉक में करीब 269 गांव फ्लोराइड से प्रभावित के रूप में चिह्नित किए गए हैं। वायु और जल प्रदूषण से काफी संख्या में ग्रामीण फ्लोरोसिस बीमारी से ग्रसित होकर अपंग का शिकार हो चुके हैं। प्रशासन की ओर से वर्ष 2010 में बसपा शासन काल में फ्लोराइडयुक्त दूषित पेयजल की समस्या से निजात के लिए राबर्ट्सगंज और दुद्धी तहसील क्षेत्र के 680 हैंडपंपों में फ्लोराइड रिमूवल प्लांट की स्थापना की गई थी ताकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो सके। देखरेख के अभाव मेें वर्तमान में अधिकांश प्लांट निष्क्रिय हो चुके हैं। हैंडपंपों में लगे प्लांट मरम्मत और रिचार्ज न होने की वजह से शोपीस बने हुए हैं। प्रशासन की ओर से प्लांटों की स्थापना के दौरान वाटर लाइफ इंडिया नामक एनजीओ की ओर से इसकी मरम्मत और रिचार्ज का काम किया गया लेकिन वर्ष 2015 के बाद एनजीओ ने मरम्मत काम करना बंद कर दिया। प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायतों को रिमूवल प्लांटों की मरम्मत कराने आदि की जानकारी दी गई थी, लेकिन अधिकांश प्रधानों के ध्यान न देने की वजह प्लांट खराब पड़े हैं और ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। हालांकि कार्यभार ग्रहण करते ही नवागत डीएम ने फ्लोराइड प्रभावित गांवों में खराब पड़े रिमूवल प्लांटों को ठीक कराकर लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने कर दिशा में पहल शुरू कर दी है। डीएम ने संबंधित अधिकारियों से रिमूवल प्लांटों के संबंध में रिपोर्ट मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
फ्लोराइड प्रभावित गांवों में खराब पड़े रिमूवल प्लांटों की मरम्मत कराकर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जाएगा। संबंधित अधिकारियों से रिमूवल प्लांटों के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा। - चंद्र विजय सिंह, जिलाधिकारी