हर आदिवासी परिवार के सिर पर जल्द ही पक्की छत होगी। खुद के आशियाने का सपना अब पूरा होगा। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत उन सभी परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए गए हैं जो अब तक विभिन्न योजनाओं से वंचित होते आ रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल 9800 आवास बनाए जाएंगे। इसमें सर्वाधिक 5280 आवास आदिवासी बैगा और चेरो जनजाति के लिए हैं।
गरीबों को पक्की छत देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना का संचालन हो रहा है। इसमें लाभार्थियों का चयन वर्ष 2011 की सामाजिक, आर्थिक जनगणना के आधार पर तैयार सेक सूची से किया गया है। बड़ी संख्या में लोग इस सूची में शामिल होने से वंचित थे। छूटे हुए लोगों को लाभान्वित करने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना शुरू की। पहले इसमें प्राकृतिक आपदा से ग्रसित, कालाजार, जेई-इंसेफेलाइटिस से प्रभावित और वनटांगिया समाज के लोगों को ही रखा गया था। बाद में इसका विस्तार करते हुए कोल, चेरो, बैगा सहित अन्य जनजातियों को भी जोड़ा गया। आदिवासी बहुल जिले में बड़ी संख्या में लोग अब भी आवास की सुविधा से वंचित हैं। पिछले दिनों डीएम ने दुद्धी तहसील क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान झुग्गी-झोपड़ी में रहते परिवारों को देखकर चिंता जताई थी। उन्हें आवास देने के लिए प्रस्ताव बनाने को कहा गया था।
अब शासन ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए मुख्यमंत्री आवास का लक्ष्य आवंटित कर दिया है। इस बार 9800 आवास बनाने का लक्ष्य जिले को मिला है। खास बात यह कि आवेदन करने वाले सभी परिवारों को इस लक्ष्य में शामिल कर लिया गया है। आवेदन करने वाला कोई भी परिवार अब पक्की छत के लाभ से वंचित नहीं रहेगा। चयनित परिवारों में बैगा और चेरो जनजाति के परिवारों की बड़ी संख्या है। चेरो जनजाति के 3757 और बैगा जनजाति के 1523 आवास स्वीकृत किए गए हैं। अन्य लाभार्थियों में कोल, मुसहर, कुष्ठ रोग, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवार शामिल हैं। आवास बनाने के लिए लाभार्थियों को खाते में शीघ्र ही पहली किश्त भेजी जाएगी।
इस सत्र में 9800 नए आवास बनाने का लक्ष्य मिला है। जितने भी आवेदन आए थे, लगभग सभी को स्वीकृति मिल गई है। सबसे ज्यादा चेरो और बैगा जनजाति के लिए आवास मंजूर हुए हैं। शीघ्र ही चयनित परिवारों को धनराशि प्रेषित कर निर्माण आरंभ कर दिया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूरा होते ही अगली किश्त खाते में ट्रांसफर की जाएगी। - आरएस मौर्य, परियोजना निदेशक।