सोनभद्र। सोनभद्र डिपो की 80 में 20 से अधिक बसों के इमरजेंसी गेट जाम हैं। फायर किट की व्यवस्था तो किसी में फर्स्ट एड बॉक्स के नाम पर सिर्फ टूटी-फूटी स्थिति में डिब्बा लटक रहा है। ऐसे में आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे हैं।
पिछले महीने यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से महोबा जा रही बस में आग से नौ लोगों की मौत को कुछ ही दिन में अधिकारी और निजी बस संचालक भूल गए। घटना के बाद परिवहन विभाग की तरफ से अभियान तो शुरू किया गया, मगर यह अभियान कुछ बसों तक सिमट कर रह गया।
अनुबंधित बसों के साथ ही मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन बसें और अन्य निजी बसों की भी यही स्थिति है। वर्तमान में सोनभद्र डिपो में 80 बसें हैं। इसमें चार अनुबंधित बसें हैं। करीब 15 से अधिक बसें निर्धारित दूरी तय कर चुकी हैं। उनकी उम्र भी लगभग पूरी हो चुकी है।
सही मरम्मत एवं देखरेख के अभाव में करीब 20 से अधिक बसों के गेट जाम हैं। रोडवेज बस स्टेशन में खड़ी कई बसों के इमरजेंसी गेट की जांच करने पर जाम मिले। कई बसें बगैर फर्स्ट एड बॉक्स की देखी गई। शिकायत पेटिका में शिकायती पत्रों की जगह नट, बोल्ट और गंदे कपड़े रखे मिले।
बढ़ौली चौक के समीप चोपन तरफ और धर्मशाला चौक के समीप वाराणसी-मिर्जापुर रूट की निजी बसें हर 25 से 30 मिनट की अंतराल पर जाती दिखाई देती हैं। बड़ी बसों में बाईं तरफ दो निकास द्वार होते हैं, इससे यात्रियों के चढ़ने और उतरने में दिक्कत तो नहीं होती। मगर दाहिने तरफ निकास द्वार नहीं होने से आपात स्थिति में यात्रियों के लिए दिक्कत हो सकती है।
सोनभद्र डिपो की रोडवेज बस के शिकायत पेटिका में रखा गंदा कपड़ा। संवाद
सोनभद्र डिपो की रोडवेज बस के शिकायत पेटिका में रखा गंदा कपड़ा। संवाद
सोनभद्र डिपो की रोडवेज बस के शिकायत पेटिका में रखा गंदा कपड़ा। संवाद