फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी विधानसभा की अंतिम सीट है दुद्धी: पहली बार मिली थी भाजपा को जीत, अब दुष्कर्म में जेल गए विधायक

Fri, 15 Dec 2023 05:01 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र

सार

प्रदेश की अंतिम दुद्धी विधानसभा सीट जिले की सबसे पुरानी सीट रही है। इससे पहले हुए 17 चुनावों में सिर्फ एक बार यह सीट जनसंघ के पाले में रही। अन्य सभी चुनाव कांग्रेस, सपा और बसपा ने ही जीते। भाजपा के लिए यह विडंबना ही रही कि जिस सीट पर निर्दल उम्मीदवार भी परचम लहराने में कामयाब रहा हो, वहां भी वह कमल नहीं खिला पाई थी।
विज्ञापन
विधायक रामदुलार गोंड - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश की अंतिम विधानसभा सीट दुद्धी भाजपा के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रही है। विधानसभा चुनावों में हर जगह जीत का परचम लहराने वाली भाजपा दुद्धी सीट जीतने में नाकाम रही थी। वर्ष 2022 में भाजपा को यह अवसर भी मिला तो अब विधायक रामदुलार गोंड को दुष्कर्म के अपराध में 25 वर्ष की सजा ने पार्टी को गहरा झटका दिया है। इससे पहले वर्ष 2017 में भाजपा और अपना दल-एस गठबंधन से निर्वाचित हुए हरिराम चेरो को भी कोर्ट ने तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। उन्हें आर्म्स एक्ट का दोषी पाया गया था। हालांकि तब तक हरिराम का कार्यकाल पूरा हो चुका था और वह बसपा में शामिल हो चुके थे।

विज्ञापन

प्रदेश की अंतिम दुद्धी विधानसभा सीट जिले की सबसे पुरानी सीट रही है। इससे पहले हुए 17 चुनावों में सिर्फ एक बार यह सीट जनसंघ के पाले में रही। अन्य सभी चुनाव कांग्रेस, सपा और बसपा ने ही जीते। भाजपा के लिए यह विडंबना ही रही कि जिस सीट पर निर्दल उम्मीदवार भी परचम लहराने में कामयाब रहा हो, वहां भी वह कमल नहीं खिला पाई थी। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल ने जीत का स्वाद भी चखा तो चुनाव निशान अपना दल-एस का कप-प्लेट था। अपना दल-एस से हरिराम चेरो को जीत हासिल मिली थी। वर्ष 2022 के चुनाव में दुद्धी विधानसभा हर हाल में को जीतने के लिए भाजपा ने पहले ही योजना बना ली थी। इस चुनाव में भाजपा ने अपना दल-एस को यह सीट न देकर अपना प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया। दुद्धी सीट से सात बार विधायक रहे आदिवासी नेता व पूर्व राज्यमंत्री विजय सिंह गोंड के गढ़ को भेदने के लिए उन्हीं के शिष्य रामदुलार गोंड पर दांव लगाया। कभी विजय सिंह के बेहद करीबी रहे रामदुलार उनके हर दांव से भली-भांति वाकिफ थे। विजय सिंह के कई चुनावों का रामदुलार ने ही संचालन किया था। चुनाव में मौका मिलते ही रामदुलार ने वही दांव लगाकर राजनीतिक गुरु कहे जाने वाले विजय सिंह को ही पटखनी दे दी थी। प्रदेश की अंतिम विधानसभा सीट पर भाजपा भले ही कमल खिलाने में सफल रहीं, मगर इस सीट पर अब खतरा मंडराने लगा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें