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Sonebhadra News: 15 दिन पहले जिस अस्पताल की सील हुई थी ओटी, उसी में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा की मौत

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दुद्धी नगर में संचालित प्रेरणा हॉस्पिटल में सोमवार की रात जच्चा- बच्चा की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया।
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दोपहर बाद सीएचसी अधीक्षक ने फोर्स के साथ पहुंचकर मेन गेट पर ताला लगाकर अस्पताल सील कर दिया। करीब 15 दिन पहले खामियों पर इस अस्पताल की ओटी भी सील की गई थी। बहेराडोल गांव के कुशवाहा टोला निवासी सोनू पटेल की पत्नी संगीता (23) गर्भवती थी।
सोमवार की देर शाम प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे लेकर प्रेरणा हॉस्पिटल पहुंचे। यहां उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। देर रात करीब 11 बजे प्रसव हुआ। इसके कुछ देर बाद ही नवजात की तबीयत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।
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घटना के वक्त अस्पताल में कोई डॉक्टर और स्टॉफ नर्स नहीं थी। आरोप है कि हॉस्पिटल संचालक ने दबाव देकर नवजात के शव को कुछ दूरी पर लौआ नदी किनारे दफन करने को भेज दिया। वापस लौटे तो प्रसूता की तबीयत भी बिगड़ गई थी।
उसे रेफर करने को कहा गया तो स्टाॅफ तबीयत ठीक होने की बात कहते रहे। रात करीब पौने तीन बजे प्रसूता संगीता देवी ने भी दम तोड़ दिया। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाया।
सूचना पाकर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों को कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दोपहर बाद परिजनों की शिकायत पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. शाह आलम अंसारी फोर्स के साथ निजी अस्पताल पहुंचे अस्पताल सील कर दिया।
सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि शिकायती पत्र में परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही, डॉक्टर के न होने सहित अन्य आरोप लगाए हैं। सूचना नोडल अधिकारी को दी गई है। मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लापरवाही पर ही सील हुई थी अस्पताल की ओटी
गत 15 जून को नोडल अधिकारी डॉ. जीएस यादव के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दुद्धी के कई निजी अस्पतालों का निरीक्षण किया था। इस दौरान खामियां मिलने पर प्रेरणा हॉस्पिटल की ओटी सील कर दी गई थी। संचालक से स्पष्टीकरण मांगा गया था। हिदायत दी गई थी कि बिना डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टॉफ के मरीजों को भर्ती भी न करें। बावजूद मनमाने ढंग से अस्पताल का संचालन जारी रहा। नतीजा जच्चा-बच्चा की जान चली गई।
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