ओबरा तापीय परियोजना में कोयला लगातार कम होने से कोयला संकट बना हुआ है। हालांकि सोमवार को दो रैक कोयला मिलने से कुछ राहत रही। स्टॉक से कोयला की कमी के बाद भी ओबरा परियोजना में 200 मेगावाट की नौवीं, 10वीं और 11वीं तीनों इकाइयों को पूरे लोड पर चलाना अधिकारियों के लिए एक चुनौती बन गई है।
ओबरा परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं. दीपक कुमार ने बताया कि ओबरा परियोजना में कोयला का पूरा स्टॉक लगभग 36 हजार मीट्रिक टन बचा है। स्टॉक के कोयले से ओबरा परियोजना की चारों इकाइयों को पूरे लोड पर चलाने के लिए तीन दिन का भी कोयला स्टॉक में नहीं है। उच्च प्रबंधन की ओर से एनसीएल से लगातार बात करने के बावजूद कोयला आपूर्ति बढ़ाने का कोई आश्वासन नहीं मिल पा रहा है। ओबरा परियोजना की 200 मेगावाट की 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं इकाई को चलाने के लिए प्रतिदिन लगभग 12 हजार मीट्रिक टन यानी तीन रैक कोयला की आवश्यकता पड़ेगी। लगातार कई दिनों से कोयला आपूर्ति कम होने से स्टॉक से कोयला उठाकर इकाइयों को चलाया जा रहा है। इससे कोयला संकट बना हुआ है। सोमवार की शाम तक ओबरा परियोजना की 200 मेगावाट की 9वीं इकाई से 166 मेगावाट, 10वीं इकाई से 193 मेगावाट और 11वीं इकाई से 170 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था।