विकास ने बताया कि उनके पिता ने करीब 35 लाख रुपये के कार्य कराए हैं। जिसके भुगतान को लेकर मानसिक, आर्थिक तरीके से शोषण किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिख न्याय की गुहार लगाई है। वहीं गाजीपुर एसपी को पत्र लिखकर अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
डीएम चंद्र विजय सिंह ने बुधवार को उरमौरा स्थित बालगृह बालक का निरीक्षण किया। बच्चों की देखभाल, भोजन सहित अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। बाल गृह जाने वाले संपर्क मार्ग की गुणवत्ता भी जांची। सीसी रोड की गुणवत्ता ठीक न होने पर आरईडी के एक्सईएन को जांच का निर्देश दिया। बालगृह के प्रभारी ने डीएम को बताया कि वर्तमान समय में बाल गृह में कुल 13 बच्चे हैं, जो अपने घर का सही पता नहीं बता पा रहे हैं। जैसे ही इन बच्चों का स्थाई पता मिल जायेगा, उन्हें सुरक्षित घर पहुंचा दिया जाएगा। इस दौरान जिलाधिकारी ने बालकों के कमरों में जाकर उनसे सीधा संवाद किया।
उन्हें दिए जा रहे नाश्ता, भोजन व अन्य सुविधाओं की गुणवत्ता के बारे में पूछताछ की। प्रभारी को निर्देशित किया कि इन बालकों के घर का पता करते रहें, ताकि उन्हें सकुशल परिजनों तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर तरीके से सुनिश्चित कराने और बालकों को निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने की हिदायत दी। इसके बाद डीएम ने बाल गृह बालक को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग का आकस्मिक निरीक्षण किया। निर्माणाधीन सीसी रोड के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता ठीक नहीं मिलने पर डीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए जांच के लिए एक्सईएन आरईडी को नामित किया। संबंन्धित निर्माण एजेंसी के ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाने और इस संबंध में पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड के एक्सईएन से स्पष्टीकरण भी तलब किया।