सोनभद्र। राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम के सर्वेक्षण में यूपी में पहला स्थान हासिल करने वाले अनपरा में नौ सिगरेट के बराबर प्रदूषण का स्तर पहुंच चुका है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। कोयले की धूल और राख के कण हवा के जरिए शरीर में पहुंचकर फेफड़ों को बीमार कर रहे हैं। बारिश के दौरान सितंबर के 15 दिनों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। ठंडी के मौसम में हालात और बिगड़ेंगे।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार इस बार अच्छी बारिश होने के बावजूद एक सितंबर को अनपरा का सूचकांक 93 था, जो अगले ही दिन 204 पर पहुंच गया। चार-पांच सितंबर को स्थिति मानक के अनुरूप मिली। छह सितंबर को फिर से यह आंकड़ा 122 पर पहुंच गया। सात, आठ और नौ सितंबर को कोई गणना नहीं की गई। 10 सितंबर को जो आंकड़ा आया उसमें स्थिति अच्छी थी लेकिन अगले ही दिन 11 सितंबर को सूचकांक 144 पर पहुंच गया। 13 सितंबर को यह आंकड़ा 124 दर्ज हुआ। 15 सितंबर (सोमवार) को सूचकांक ..... दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़े जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के मामले में दिल्ली को भी पीछे छोड़ देने वाले हैं। वहीं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) का दावा है कि प्रदूषण की स्थिति नियंत्रण में है और उनकी तरफ से जो सूचकांक दर्ज किए गए हैं वह संतोषजनक हैं।
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दिल्ली से भी खराब पाए गए हालात :
आंकड़े बताते हैं कि दो सितंबर को जब सिंगरौली परिक्षेत्र (सिंगरौली की प्रदूषण प्रभावित एरिया के साथ सोनभद्र को ओबरा-दुद्धी तहसील क्षेत्र) का सूचकांक 204 था। तब दिल्ली का सूचकांक 52 था। छह सितंबर को सोनभद्र में सूचकांक 122 तो दिल्ली में 73 रहा। वहीं 11 सितंबर को सोनभद्र में 144 तो दिल्ली में 94, तेरह सितंबर को सोनभद्र में 124 तो दिल्ली में 109 सूचकांक दर्ज किया गया। यह स्थिति तब है जब सोनभद्र-सिंगरौली में वायु प्रदूषण की स्थिति जांचने के लिए यूपी-एमपी सीमा पर एक ही संयंत्र स्थित है। वहीं दिल्ली में 30 से अधिक संयंत्रों से इसकी निगरानी हो रही है। बता दें कि इस बार जिले में 14 सितंबर तक 898.2 मिमी (पूर्वांचल में सर्वाधिक) रिकार्ड की गई है। बावजूद जो आंकड़े सामने आए हैं वह चिंता में डालने वाले हैं।
इन्हें माना जाता है प्रदूषण का प्रमुख कारण :
सोनभद्र में नौ बिजली घर, एक एल्युमिनियम, एक कार्बन, दो केमिकल प्लांट और चार कोयला खदानें संचालित हैं। वहीं ढाई सौ से अधिक क्रशर प्लांटों का संचालन किया जा रहा है। महज बिजली घरों में हर दिन तीन लाख टन से अधिक कोयला जलाया जा रहा है जिससे रोजाना लगभग सवा लाख टन फ्लाई ऐश निकल रही है। वहीं भारी वाहनों का बड़ी मात्रा में आवागमन खासकर कोयले और राख की असुरक्षित ढुलाई को भी प्रदूषण का बड़ा कारक माना जाता है।
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कितना प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए घातक-
अगर किसी इलाके का सूचकांक 22 है तो माना जाएगा कि जितना एक सिगरेट के जरिए फेफड़े को नुकसान पहुंचता है, उतना नुकसान प्रदूषण के जरिए पहुंच रहा है। दो सितंबर को दर्ज एक्यूआई को देखें तो बारिश के सीजन में भी जिले का प्रदूषण नौ सिगरेट से भी अधिक नुकसान पहुंचाने वाला है। बता दें कि 0 से 33 तक का सूचकांक बहुत अच्छा, 34 से 66 तक अच्छा, 67 से 99 तक औसत, 100 से 149 खराब, 150 से 200 तक बहुत खराब और 200 से अधिक सूचकांक को खतरनाक श्रेणी का माना गया है।
वर्जन
राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम से अनपरा परिक्षेत्र में प्रदूषण को तेजी से नियंत्रित करने में सफलता मिली है। हमारे पास जो सूचकांक के आंकड़े हैं, वह 100 के नीचे हैं। इस लिहाज से स्थिति नियंत्रण में है। बारिश के सीजन के बाद स्थिति गंभीर न होने पाए, इसके लिए सभी उद्योगों, परियोजनाओं को कड़े निर्देश गए हैं। -आरके सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।