Chaiti Chhath 2025 : सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय आस्था का पर्व चैती छठ का समापन हुआ। इस दौरान भक्तों ने अपने कमर तक जल में खड़े होकर सूर्यदेव भगवान को अर्घ्य दिया।
सोनभद्र जिले में नगर स्थित शिवाजी तालाब के छठ घाट पर शुक्रवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हवन पूजन के साथ ही चार दिवसीय आस्था का पर्व चैती छठ का समापन हो गया। महिलाओं ने चैती छठ पर्व बड़े ही उत्साह से मनाया।
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शुक्रवार को शिवाजी तालाब पर स्थानीय नगरवासियों ने सुबह के समय भगवान सूर्य को पूरब दिशा में व्रती महिलाएं और पुरुष अपने कमर तक जल में खड़े होकर सूर्यदेव भगवान को अर्घ्य दिया। साथ ही लोग अपने हाथ में सूप लेने के साथ, लाल-पीली साड़ी पहनकर, अपने बाल खुले रखकर, मांग से नाक तक सिंदूर लगाकर खड़े रहे।
आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र और कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाई जाती है। इसे छोटी छठ कहते हैं। इस अवसर पर महिलाओं ने पति और बच्चों की सलामती के लिए व्रत रखा है। इसमें भी बड़ छठ पर्व की तरह ही नियम होते हैं।
शुक्रवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया। पुराणों में मां दुर्गा के छठे रूप कात्यायनी देवी को भी छठ माता का ही रूप माना जाता है। इस अवसर पर आयोजन समिति द्वारा घाट पर साफ सफाई के साथ अन्य सुविधाओं को देने में लगे रहे।