घोरावल। जिला कारागार गुरमा में बुधवार को संदिग्ध हाल में उम्भा नरसंहार कांड के आरोपी बंदी हीरालाल 65 की मौत हो गई। इसकी जानकारी होने मृतक के घरवालों में कोहराम मच गया। जिला अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम हुआ। जेल प्रशासन ने बीमारी से मौत होने की बात बताई है। जबकि मृतक के बेटे ने संदिग्ध हाल में मौत होने का आरोप लगाया है। मृतक हीरालाल के बेटे रामनारायण का कहना है कि उसके पिता की मौत किन परिस्थितियों में हुई उसे या परिवार के अन्य सदस्यों को कोई जानकारी नहीं है। जेल कर्मियों द्वारा सूचना देने पर वह जिला अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए पहुंचा।
रामनारायण ने बताया कि उसके पिता निर्दोष थे, लेकिन पुलिस ने उभ्भाकांड में उन्हें फंसाकर जिला जेल में बंद करवा दिया। उनकी मौत कैसे हुई इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उधर जेल कर्मियों ने बताया कि हीरालाल बीमार था। उसके लीवर में इंफेक्शन था। इसकी जानकारी पर उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां से डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया था। इसके बाद बीएचयू से उसका उपचार चल रहा था। बताते चलें कि आदिवासी बहुल उभ्भा गांव में गांव में 17 जुलाई 2019 को जमीनी विवाद में हुए खूनी संघर्ष में जमकर असलहे, लाठी डंडे चले थे, जिसमें गोंड़ समुदाय के तीन महिलाओं समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 लोग घायल हुए थे। इस सम्बंध में यज्ञदत्त, गणेश, धर्मेंद्र, नीरज, अशर्फी समेत 28 लोगों पर नामजद और 50 अज्ञात लोगों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस केस में 70 आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं और अभी केस चल रहा है। इस केस के दस आरोपियों को बीते महीने जमानत मिल चुकी है।
जिला कारागार गुरमा के जेल अधीक्षक मिजाजी लाल का कहना है कि उभ्भाकांड के आरोपी हीरालाल की बीमारी से मौत हुई है। बीएचयू में उसका उपचार चल रहा था। दो दिन पूर्व बीएचयू के डॉक्टरों ने उसे जवाब दे दिया था। इसलिए उसे जेल के अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जा रहा था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शव का पोस्टमार्टम कराकर घरवालों को सुपुर्द कर दिया गया।