जिले में पखवारे भर पहले ही ऑक्सीजन की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ रहा था लेकिन अब ब्लड बैंक में खून की कमी से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। राबर्ट्सगंज स्थित ब्लड बैंक में महज 12 फीसदी ही रक्त बचा है। एबी निगेटिव और बी निगेटिव ग्रुप का रक्त नहीं है। ऐसे में अगर किसी को रक्त की जरूरत पड़ी तो मिलना मुश्किल है।
कोविड अस्पताल या निजी अस्पताल में पखवारा भर पहले ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ता है। हालांकि जिला प्रशासन के प्रयास से ऑक्सीजन की समस्या दूर हो गई, लेकिन अब जिले के ब्लड बैंकों में खून की कमी का मामला प्रकाश में आने लगा है। राबर्ट्सगंज स्थित ब्लड बैंक में महज 12 फीसदी ही ब्लड बचा है। उसी से किसी तरह काम चलाया जा रहा है। अब अगर शीघ्र रक्त का इंतजाम नहीं हुआ तो गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, शुक्रवार को ब्लड बैंक परिसर में रक्तदान शिविर लगाकर रक्तदान किया जाएगा। तीन सौ यूनिट रक्त की क्षमता वाले ब्लड बैंक में हमेशा 200 या 250 यूनिट ब्लड रहता है। आमतौर पर यहां सभी ग्रुप का ब्लड मिल जाता है, लेकिन इधर करीब एक माह से कई ग्रुप के रक्त की कमी हो गई है। कोविड-19 की वजह से रक्तदान करने वाले भी नहीं आ रहे हैं। साथ ही कुछ ब्लड डोनर कोविड पॉजिटिव हो गए, इस वजह से भी दिक्कत हुई। ब्लड बैंक के अधिकारियों के मुताबिक एबी निगेटिव और बी निगेटिव ग्रुप का ब्लड बिल्कुल ही नहीं है।
किस ग्रुप का कितना ब्लड बचा है
ब्लड बैंक राबर्ट्सगंज में ए पॉजिटिव ग्रुप का चार यूनिट और निगेटिव ग्रुप का दो यूनिट खून बचा है। इसी तरह बी पॉजिटिव का 15, एबी पॉजिटिव का एक, ओ पॉजिटिव का 11 और ओ निगेटिव का चार यूनिट रक्त बचा हैं। बी निगेटिव और एबी निगेटिव का खून नहीं है। ब्लड बैंक से प्रतिदिन 20 से 25 यूनिट रक्त की मांग होती है।
टीका लगवाने के बाद भी दे सकते हैं रक्त
ब्लड बैंक के प्रभारी मानिक चंद्र ने बताया कि रक्तदान महादान है। ज्यादा से ज्यादा लोग रक्तदान करें। कहा कि जो कोरोना पॉजिटिव थे वे ठीक होने के 14 दिन बाद चाहें तो रक्तदान कर सकते हैं। इसके साथ ही टीक लगवाने वाले भी 14 दिन के बाद रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान करने वाले व्यक्ति में 12.5 फीसदी एचबी, 18 वर्ष से 65 वर्ष के बीच की उम्र, कम से कम 45 किलोग्राम वजन होना जरूरी है।