एलडीएम से मांगी रिपोर्ट, नई बाजार स्थित बैंक शाखा के बैंक सखी, शाखा प्रबंधक सहित कई पर मिलीभगत का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनभद्र। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने कभी क्रेडिट कार्ड (सीसी) लिमिट बढ़ाने तो कभी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके खाते से करीब 90 लाख रुपये उड़ाने का आरोप लगाया है। पोल तब खुली जब पीड़ित महिलाएं अपने खाते का स्टेटमेंट निकलवाने पहुंचीं। फिलहाल इस मामले में कोमल आजीविका सहायता समूह की अध्यक्ष आशा ने कार्रवाई की गुहार लगाई है। शनिवार को रॉबर्ट्सगंज तहसील पहुंचकर शिकायती पत्र भी सौंपा।
पत्र में राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र निवासी आशा ने बताया कि वह कोमल आजीविका सहायता समूह की सखी और अध्यक्ष हैं। उसके गांव की ही किरन इंडियन बैंक की नई बाजार शाखा में बैंक सखी के रूप में कार्यरत हैं। समूह से जुड़ी महिलाओं को रोजगार के लिए सरकार प्रोजेक्ट की लागत का 90 प्रतिशत धन देती है। लाभार्थी को महज 10 प्रतिशत अंशदान करना होता है। आरोप है कि किरन ने उसे समूह की सीसी लिमिट बढ़वाने का झांसा दिया और उसके लिए समूह से जुड़ी सभी महिलाओं के आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मुहर, कार्यवाही रजिस्टर लेने के साथ ही ट्रांसफर पर्ची और सादे विड्राल पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। कहा गया कि एक-दो महीने में लिमिट बढ़ जाएगी। उसके खाते का एक नया पासबुक भी उसे दिया गया।
इस तरह की जा रही थी पैसे की निकासी
करीब 20 दिन बाद विभाग की ब्लाॅक अफसर (बीएमएम) ने समूह की सभी सदस्यों को खाते का स्टेटमेंट निकलवाने और पासबुक प्रिंट कराने के लिए कहा। तब पता चला कि वह सब ठगी का शिकार हो गई हैं। जब उसने अपना खाता चेक किया तो पता चला कि समूह के खाते से 90 हजार रुपये पहले उसके निजी खाते में स्थानांतरित करवाए गए। इसके बाद उसका विड्राल भरकर निकाल लिया गया। इसी तरह अन्य समूह के खाते से 70 हजार रुपये किरन की सास के खाते, 50 हजार रुपये देवरानी मनीषा के खाते में स्थानांतरित कराकर निकले गए। दावा किया गया है कि इसी तरह कई और समूह और समूह सखियों से ठगी की गई है। कई लोगों के खाते से रुपये निकालकर उसका उपयोग जमीन खरीदारी और बिटक्वाईन जैसे कार्यों में किया जा रहा है।
रुपये निकासी में बैंक मैनेजर सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। 70 से 90 लाख तक का गबन हुआ है। कम पढ़ी-लिखी होने का फायदा उठाकर यह धोखाधड़ी की गई। एक साल पहले ही बीएमएम को जानकारी दे दी थी। छह माह पूर्व बैंक मैनेजर से भी एतराज दर्ज कराया। तब सब ठीक करने का आश्वासन दिया गया था, अब पल्ला झाड़ लिया गया। अलबत्ता दबाव बनवाकर पांच लाख जमा करवाए गए। शेष रकम अपने यहां से जमा करने के लिए कहा गया। अब उससे भी कन्नी काट ली गई। बैंक मैनेजर और उनके सहकर्मियों ने ही उसके, उसके परिवार, रिश्तेदारों के खाते में पैसे डलवाए और उसकी निकासी करवाई।- किरन, बैंक सखी (आरोपी)।
प्रकरण का संज्ञान लिया गया है। मामले में लीड बैंक मैनेजर को जांच कर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जो भी स्थिति सामने आएगी उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। -अश्वनी सिंह, एसडीएम सदर।
इस मामले में बैंक प्रबंधक या किसी भी बैंक कर्मी के संलिप्तता के आरोप पूरी तरह झूठे हैं। कई समूहों के जरिये 90 लाख नहीं सिर्फ समूह की दो महिलाओं के खाते से गलत तरीके से रुपये के निकासी की शिकायत उनके सामने आई है। इसकी विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है। - आलोक पटेल, शाखा प्रबंधक, इंडियन बैक, नईबाजार।