सोनभद्र। शिक्षकों की कमी से जूझते जिले के परिषदीय विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट क्लास बेकार हो गए हैं। करीब 60 फीसदी स्कूलों में इनका संचालन ठप है। कहीं बिजली नहीं है तो कहीं तकनीकी खामियों से स्मार्ट क्लास का संचालन नहीं हो पा रहा है। जहां बिजली है भी तो वहां आपूर्ति व्यवस्था की बदहाली स्मार्ट क्लास के संचालन में बाधा आ रही है। स्कूल समय में भी बमुश्किल डेढ़ से दो घंटे बिजली मिलती है उसमें भी बार-बार कट से बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ाई नहीं कर पा रहे।
जिले में संचालित विभिन्न परियोजनाओं के सामाजिक-निगमित दायित्व (सीएसआर) मद से 361 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए हैं। सबसे ज्यादा स्मार्ट क्लास बभनी, म्योरपुर, दुद्धी, चोपन और कोन ब्लॉक क्षेत्र में हैं। देखभाल न होने से ज्यादातर स्मार्ट क्लास का संचालन ठप है। बिजली सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा यूपीएस और सेंसर में तकनीकी दिक्कत से भी स्मार्ट क्लास लंबे समय से बंद पड़े हैं। शिक्षकों का कहना है कि कई बार सूचना देने के बाद भी इसकी मरम्मत नहीं कराई जा सकी है। नतीजा कई जगह यह क्लास 10 माह तो कहीं इससे भी ज्यादा समय से बंद है।
बभनी: 40 स्मार्ट क्लास में से 14 चालू, 5 में बिजली नहीं तो 2 में इंस्टाल नहीं
छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित आदिवासी बहुल बभनी ब्लॉक के 40 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित है। इसमें सिर्फ 14 में ही संचालन हो पा रहा है। कंपोजिट विद्यालय सहगोड़ा, चौना, बड़होर, बभनी, मझौली, खैराडीह, महुआ दोहर, करकच्छी, प्राथमिक विद्यालय असनहर, करवाटोला सहित 26 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास महीनों से बंद पड़ा है। प्राथमिक विद्यालय बसकट्टा, महुआरी टोला, भैसाबांध टोला, अधौरा और चैनपुर में सिस्टम इंस्टाल है, लेकिन बिजली न होने से इनका संचालन नहीं हो पा रहा। ब्लॉक के बरवाडाड़ और बरवाटोला प्रथम विद्यालय में सिस्टम की इंस्टाल नहीं हो पाया है। जिन 14 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास चालू है, वहां भी बिजली के अक्सर गुल रहने से संचालन बाधित है।
म्योरपुर : लो वोल्टेज और बैट्री खराब तो कहीं चूहे काट गए तार
सबसे ज्यादा बिजली परियोजनाओं वाले इस ब्लॉक के 54 स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित है। विभागीय रिकॉर्ड में सब चालू हैं, जबकि हकीकत अलग है। वर्तमान में सिरसोती कंपोजिट विद्यालय में करीब दो माह से स्मार्ट क्लास केबल व सेंसर की खराबी से बंद है। कंपोजिट विद्यालय बीजपुर पुनर्वास में 350 बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ते थे, लेकिन बैटरी और केवल खराब होने से यहां भी पढ़ाई बंद है। कंपोजिट विद्यालय डोडहर में भी तकनीकी खराबी से स्मार्ट क्लास संचालित नहीं हो पा रहा।
दुद्धी: चार विद्यालयों में बिजली ही नहीं, फिर भी बने हैं स्मार्ट क्लास
दुद्धी ब्लॉक में कुल 218 विद्यालय हैं। इसमें से 39 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की सुविधा है। चार विद्यालय प्राथमिक विद्यालय रजखड़ पूर्वी, घाट पिंडारी दुमहान, नगवां पूर्वी, गुप्ता बस्ती घीवहीं में बिजली का कनेक्शन नहीं होने से स्मार्ट क्लास शोपीस बने हैं। प्राथमिक विद्यालय रजखड़ पूर्वी में भी प्रोजेक्टर, पंखा, वायरिंग सारी व्यवस्था है, मगर बिजली कनेक्शन नहीं होने से उपकरण बेकार पड़े हैं। प्राथमिक विद्यालय नगवां पूर्वी और गुप्ता बस्ती में भी बिजली की सुविधा नहीं है। विभाग बिजली विहीन विद्यालयों के लिए सोलर लाइट की व्यवस्था में जुटा है।
काेन: 20 में स्मार्ट क्लास, ज्यादातर बंद
अति पिछड़े ब्लॉक कोन के कुल 20 परिषदीय स्कूलों मे स्मार्ट क्लास स्थापित है। ज्यादातर बंद पड़े हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय चांचीकला में नेटवर्क की समस्या से स्मार्ट क्लास के संचालन में दिक्कत आती है। इसके अलावा महीनों से यूपीएस खराब है। उच्च प्राथमिक विद्यालय देवाटन में लगा स्मार्ट क्लास शुरू से ही शोपीस है। तकनीकी खराबी के कारण आजतक सुधार नहीं हो पाया है। यही हाल अन्य स्कूलों में लगे स्मार्ट क्लास के भी हैं।
अन्य ब्लॉकों में भी हाल खराब
जिले के अन्य ब्लॉकों में भी स्मार्ट क्लास की स्थिति खस्ता है। बिहार सीमा पर स्थित नगवां ब्लॉक के 16 स्कूलों में स्मार्ट क्लास बने हैं, मगर सिर्फ चार में ही संचालन हो रहा है। आकांक्षी ब्लॉक चतरा ब्लॉक में 15 स्कूलों में स्मार्ट क्लॉस स्थापित है। विभाग का दावा है कि सिर्फ बिजली की कटौती से दिक्कत आती है। चोपन, घोरावल ब्लॉकों की भी यही स्थिति है। सदर व करमा ब्लॉक में स्थिति कुछ ठीक है।
जिले में सीएसआर मद से साढ़े तीन सौ से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित किए गए हैं। इसके मेंटनेंस का जिम्मा संबंधित कार्यदाई संस्था है। जहां दिक्कत आती है तो स्कूलों के माध्यम संबंधित ग्रुप में सूचना दी जाती है, जिसके आधार पर संस्था उसकी मरम्मत कराती है। उन्हीं स्कूलों में स्मार्ट क्लास लगे हैं, जहां बिजली की सुविधा उपलब्ध है। - नवीन कुमार पाठक, बीएसए।