सोनभद्र। साढ़े तेरह साल पहले यज्ञ स्थल के लिए हुई मारपीट में घायल महिला की मौत के मामले में सत्र न्यायाधीश रवींद्र विक्रम सिंह की अदालत ने शनिवार को बाप, उसके दो बेटों, दो सगे भाइयों सहित एक ही परिवार के छह सदस्यों को दोषी करार दिया। साथ ही दोषियों को 5-5 वर्ष की सजा सुनाई। हर दोषी पर साढ़े आठ-आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना की 75 प्रतिशत धनराशि पीड़ित पक्ष को देने का आदेश भी दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दुद्धी थाना क्षेत्र के धनौरा गांव निवासी प्रह्लाद पांडेय ने विंढमगंज थाने में दी तहरीर दी थी। उनका कहना था कि 18 जनवरी 2011 की सुबह उनके रिश्तेदार विंढमगंज थाना क्षेत्र के पतरिहा निवासी रामनगीना चौबे महुली बाजार गए थे। बाजार में उनका प्रकाश चंद्र चौबे से यज्ञ स्थल को लेकर विवाद हो गया। इसी बीच गांव के ही कामेश्वर चौबे, उसके बेटे शेषमणि चौबे और योगेंद्र चौबे, परिवार के ही प्रमोद चौबे, प्रदीप चौबे भी आ गए। सब लामबंद होकर लाठी-डंडे के साथ रामनगीना चौबे के घर में घुस आए और उनकी जमकर पिटाई की। प्रमोद और प्रदीप सगे भाई हैं।
बीच बचाव में आए रामनगीना की पत्नी सुमित्रा देवी, बेटे बुंदेल कुमार चौबे, बहू किरन देवी और बेटी सुजाता चौबे को भी मारा पीटा। गंभीर रूप से घायल लोगों को दुद्धी सीएचसी से जिला अस्पताल और फिर वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया। इलात के दौरान ही सुमित्रा देवी की मौत हो गई थी। पुलिस ने पर्याप्त सबूत मिलने पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
अदालत ने मामले में 6 मार्च 2013 को ही दोषियों के खिलाफ आरोप तय कर दिया था। पुलिस ने जो आरोप पत्र दाखिल किया था, उसके मुताबिक जानलेवा हमले में चोट लगने से सुमित्रा देवी की मौत हुई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने नामजद सभी आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा सुना दी। अदालत ने कहा कि जुर्माना न देने पर दोषियों को चार-चार महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।