वाराणसी के सहायक रजिस्ट्रार फर्म सोसायटी व चिट्स पर राज्य सूचना आयोग ने 25 हजार का जुर्माना अधिरोपित किया है। मामला शक्तिनगर में स्थित ज्वालामुखी मंदिर परिसर से जुड़ा है।
आरोप है कि शक्तिपीठ ज्वालामुखी मंदिर की फर्जी समिति बनाकर पुरोहित परिवार के एक सदस्य ने खुद को प्रधान पुजारी घोषित कर दिया। इस पर सोसायटी रजिस्ट्रार के यहां आपत्ति दाखिल की गई। दावा किया गया कि झूठे तथ्यों के आधार पर समिति गठित हुई और नवीनीकरण भी हो गया। इस मामले में जानकारी मांगी गई लेकिन रजिस्ट्रार कार्यालय ने उपलब्ध नहीं कराया। इसी प्रकरण में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में दर्ज याचिका की सुनवाई करते हुए सूचना आयुक्त अजय कुमार उपरेती ने जन सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 20 के तहत सहायक रजिस्टर फर्म सोसायटी एवं चिट्स वाराणसी को दोषी करार देते हुए 25000 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित कर कर दिया।
याचिकाकर्ता हेमंत मिश्र ने बताया कि ज्वालामुखी मंदिर पुजारी परिवार की ओर से पारित प्रस्ताव एवं शपथ पत्र प्रस्तुत करते हुए मां ज्वालामुखी संचालन समिति नामक संस्था को सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1860 की धारा 12 डी के तहत निरस्त कराए जाने के लिए साल 2018 में वाद दाखिल किया गया था। प्रकरण में प्रत्यावेदन अधिकारी नहीं होने के बावजूद सहायक रजिस्ट्रार वाराणसी द्वारा नियम विरुद्ध फर्जी समिति का नवीनीकरण कर दिया गया। सूचना आयोग ने सहायक रजिस्ट्रार फर्म सोसायटी एवं चिट्स वाराणसी योगेंद्र चंद्र त्रिपाठी को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सूचना न देने का दोषी मानते हुए अर्थदंड वसूली का आदेश दिया। समयबद्ध वसूली नहीं होने पर इसे भू राजस्व के बकाये के तहत वसूली किया जाने का आदेश डीएम वाराणसी को दिया गया है।