पहले गिने-चुने लोगों में होने वाला कैंसर अब तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से की जा रही स्क्रीनिंग के दौरान हर महीने करीब 20 नए मरीज सामने आ रहे हैं।
जिले में कैंसर के जांच व उपचार की समुचित व्यवस्था न होने से उन्हें वाराणसी या अन्यत्र भेजा जा रहा है। कैंसर के बढ़ते असर के लिए जागरूकता की कमी और दूषित खानपान को भी कारण माना जा रहा है।
जिले के अस्पतालों के आंकड़ों पर गौर करें तो अकेले मेडिकल काॅलेज के दंत रोग और मुख रोग विभाग में हर महीने आठ से नौ मरीजों में कैंसर की प्रारंभिक पुष्टि हो रही है।
इसके अलावा गर्भाशय, स्तन कैंसर, गुदा एवं गाल ब्लैडर, अंडाशय कैंसर के साथ ही फेफड़े और शरीर के किसी हड्डी में कैंसर के मामले भी सामने आ रहे हैं। हर महीने विभिन्न विभागों में 20 से 22 की संख्या में कैंसर के मरीज मिल रहे हैं।
समय से पहचान होने पर इसे रोका जा सकता है। डॉक्टरों के अनुसार महिलाओं में सबसे अधिक गर्भाशय, स्तन और अंडाशय कैंसर देखने को मिलते हैं। समय से पहचान होने पर इसे रोका जा सकता है।
पुरुष सबसे अधिक फेफड़े, ब्लड कैंसर, लिम्फोमा, ब्रेन ट्यूमर, बोन ट्यूमर, गले और मुंह के कैंसर की चपेट में आते हैं। गुदा एवं गोल ब्लाडर के भी कैंसर सामने आते हैं।
जिले में जांच की सुविधा नहीं
जिले में कैंसर की पहचान के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है। ऐसे में स्क्रीनिंग के जरिए मरीजों की पहचान कर उन्हें रेफर किया जाता है। बायोस्पी जांच तक की भी सुविधा नहीं है। पेट में कैंसर की पहचान भी बेहतर तरीके से नहीं हो पाती है। ऐसे में मरीजों को वाराणसी रेफर होना होता है। अगर कैंसर शुरुआती समय में पकड़ में आ जाए तो खतरा न के बराबर रहता है। जिले में ज्यादातर मरीजों में यह काफी लेट पकड़ में आता है।