सोनभद्र। जिले में ज्यादातर अल्ट्रासाउंड सेंटरों के रजिस्ट्रेेशन फेल हो गए हैं। ऐसे में इन सेंटरों से सही अल्ट्रासाउंड की सही रिपोर्ट मिलने की उम्मीद पर पानी फिर रहा है। संबंधित सेंटरों के नवीनीकरण को लेकर चल रही प्रक्रिया में पेंच फंस गया है। डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने नियमानुसार पंजीकरण न होने पर इसकी जांच शुरू करा दिया है। सीएमओ डॉक्टर एसपी सिंह ने बताया कि डॉक्टर एसके वर्मा के अगुआई में दो सदस्यीय टीम पूरी जांच कर एक सप्ताह में डीएम को रिपोर्ट देगी।
जिले में 24 अल्ट्रासाउंड मशीनें लगी हैं। रेडियोलाजिस्ट, गाइकोनोलाजिस्ट, सोनोलाजिस्ट या फिर इससे संबंधित छह माह का प्रशिक्षित व्यक्ति ही अल्ट्रासाउंड मशीनें चला सकता है, लेकिन जिले में इसके संचालकों की कमी है। कुछ जगहों पर अप्रशिक्षित लोग अल्ट्रासाउंड मशीनें चला रहे हैं। इसका नतीजा होता है कि अक्सर यह सुनने में आता है कि अल्ट्रासाउंड की दो अलग-अलग जगहों की जांच में अलग-अलग तरह की रिपोर्ट भी आती है। इससे मरीजों के समक्ष परेशानी खड़ी हो जाती है। फिलहाल जिले में ज्यादातर अल्ट्रासाउंड सेंटरों की स्थिति बिल्कुल अलग है। ज्यादातर सेंटर के स्वास्थ्य विभाग से होने वाले पंजीकरण ही फेल हो गए हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिरकार फिर यह केंद्र कैसे और किसकी शह पर संचालित हो रहे हैं। राबर्ट्सगंज में तीन, रेणुकूट में एक अल्ट्रासाउंड सेंटर का पंजीकरण फेल हो चुका है। कई अन्य के भी रजिस्ट्रेशन फेल हैं। संबंधितों ने नवीनीकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय में आवेदन भी किया लेकिन अब वह अधर में लटक गया है। वजह कि डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने प्रसव पूर्व निदान तकनीकी (पीसीपीएनडीटी) का हवाला देते हुए सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच कराने का निर्देश सीएमओ को दिया है। उधर सीएमओ ने बताया कि एसीएमओ डॉ. एसके वर्मा और डिप्टी सीएमओ डॉ. प्रेमनाथ की दो सदस्यीय टीम अल्ट्रासाउंड केंद्रों के मानक की जांच करेगी। फिर एक सप्ताह में डीएम को रिपोर्ट देगी। इसके बाद अग्रिम कार्रवाई होगी।