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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का प्रांतव्यापी आंदोलन समाप्त

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सात जनपदों में बिजली निजीकरण के टेंडर वापस लेने और उत्तर प्रदेश में कहीं भी कोई निजीकरण न करने के लिखित समझौते के बाद गुरुवार को बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं का आंदोलन समाप्त हो गया।
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प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के मध्य हुए लिखित समझौते के बाद संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में पिछले 19 दिन से चल रहे प्रांतव्यापी आंदोलन को वापस ले लिया है। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की उपस्थिति में पावर कारपोरेशन प्रबंधन से हुई वार्ता के बाद सौहादपूर्ण वातावरण में लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। संघर्ष समिति की ओर से शैलेंद्र दूबे, राजीव सिंह, जीके मिश्रा, एके सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरूदद्ीन राना, सुहैल आबिद, विपिन प्रकाश वर्मा, राजेंद्र घिल्डियाल, परशुराम, पीएन राय, पूसे लाल, एके श्रीवास्तव, महेंद्र राय, शशिकांत श्रीवास्तव, करतार प्रसाद, राम प्रकाश आदि ने हस्ताक्षर किये।
लिखित समझौते के बिंदु एक में लिखा गया है कि इंटीग्रेटेड सर्विस प्रोवाइडर के लिए जारी की गयी निविदा टेण्डर प्रबंधन ने वापस ले लिया है। उल्लेखनीय है कि रायबरेली, कन्नौज, इटावा, उरई, मऊ, बलिया व सहारनपुर के निजीकरण के टेंडर गत फरवरी में किये गये थे जिन्हें मार्च में निजी क्षेत्र को हैंडओवर किया जाना था जो अब वापस ले लिए गए हैं।
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