गर्मी में तापमान बढऩे के साथ गहराया पेयजल संकट
घोरावल फुल डार्क जोन होने के बावजूद नहीं मिली राहत
नदियों में उडऩे लगी धूल, भू-जल स्तर भी खिसका
अमर उजाला ब्यूरो
सोनभद्र। जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा वैसे-वैसे पेयजल की समस्या गहराती जा रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र हो या फिर भाट इलाका पेयजल की किल्लत का स्थाई हल न होने से यहां के लोग आज भी नाले या फिर चुआड़ के गंदे पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
नगवा ब्लाक में जल संकट से लोगों की नींद उड़ी हुई है। कूप, नलकूप, तालाब, हैंडपंप इस गर्मी में सूखने लगे हैं। नदियों में भी धूल उडऩे लगी है। हालत इस कदर बदतर है कि हाल के दिनों में रिबोर हुए हैंडपंप भी पानी छोड़ चुके हैं। सोनांचल में पानी की समस्या को देखते हुए शासन ने टैंकर से पानी की आपूर्ति का निर्देश दिया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी जल निगम द्वारा टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। ब्लाक के पहाड़ी अंचल के ग्रामीण दूषित चुआड़ के पानी से प्यास बुझाने को मजबूर हैं। जिससे तमाम संक्रामक रोग होने के डर बना रहता है।
घोरावल ब्लाक के कई गांवों में भूजल स्तर नीचे चले जाने से पेयजल किल्लत खड़ी हो गई है। पेयजल के मुद्दे पर इस ब्लाक को फुल डार्क जोन घोषित किया गया है। यहां पशुओं के लिए भी जल संकट गहराने लगा है। बीते फरवरी माह से ही पानी के लिए इलाके में लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ रही। मार्च से जून तक पानी के लिए हाहाकार मचना तय है। सतौहा, सतद्वारी, बरकन्हरा, नेवारी, भरौली, पाती, बंधा, डोमखरी, खिरिष्टा, बेलवनिया, दीवा, करौंदिया, केवटा, सिरसाई, छाईन, नौगवां नंदलाल, खुटहा, बिसरेखी, मिझुन समेत ब्लॉक के अधिकांश गांवों में पेयजल को लगे ज्यादातर हैंडपपों ने जवाब दे दिया है। नीरज, अजय गिरी, संदीप दूबे, सियाराम यादव, कुंजबिहारी बैसवार इत्यादि ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष वर्षा काफी कम होने से भूगर्भ जल स्तर लगातार नीचे की तरफ खिसकता चला जा रहा है।
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जर्जर, ढीले तार बिजली सप्लाई में बन रहे बाधक
- पसही फीडर में लो-वोल्टेज की समस्या का नहीं हुआ निस्तारण
- नक्सल प्रभावित गांव में बिजली के लिए करनी पड़ रही जद्दोजहद
सोनभद्र । जिले में बिजली व्यवस्था बेपटरी है। नक्सल प्रभावित गांवों में स्थिति और भी दयनीय है। जर्जर उपकरण, लटके तार, खस्ताहाल बिजली के खंभे विद्युत सप्लाई में बाधक बन रहे हैं। यही वजह है कि शासन से तय घंटे भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों खासकर ग्रामीण इलाकों को बिजली नहीं मिल रही है।
जिला मुख्यालय से लगे पसही फीडर की हालत बद से बदत्तर हो गई है। पसही फीडर से दो दर्जन से अधिक गांवों को बिजली आपूर्ति होती है लेकिन लो वोल्टेज की समस्या से लोगों को जूझना पड़ रहा है। जर्जर तार होने के कारण आए दिन ब्रेकडाउन के चलते बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। कभी रात में 11 बजे तो कभी एक बजे बिजली के दर्शन होते है लेकिन कुछ ही घंटों के लिए।
खलियारी : नगवा ब्लाक के दूबेपुर सब-स्टेशन से नक्सल प्रभावित लगभग 100 गावों में बिजली सप्लाई की जाती है। खलियारी, अमडीह, कोहरावल, सराईगड, पर्डी, सुअरसोत, तेंदुआ, काजियारी, बांकी, मांची, नौडीहा समेत दर्जनों गांवों में बिजली की सप्लाई की जाती है लेकिन सबस्टेशन से निकले 11 हजार केवी लाइन के ढीले तार, झुके खंभे व टूटे क्रास आइरन विद्युत आपूर्ति में रूकावट डाल रहे हैं।
बीजपुर : म्योरपुर ब्लाक के महुली गांव के कई टोलों में आज तक बिजली नहीं पहुंच सकी है। सात टोले वाले इस ग्राम पंचायत में महज जलजलिया और महुली खास के कुछ घरों को छोड़ दिया जाए तो बिजली है ही नहीं। इस ग्राम पंचायत के लखार, रहरेठाडॉड़, धरिकार बस्ती, सरईदाड़, बाडर टोला के करीब 25 सौ परिवार के लोग आज भी ढीबरी युग में जीने को मजबूर हैं।
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सोनांचल की सड़कें नहीं हो सकी गड्ढामुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
सोनभद्र । प्रदेश सरकार जहां सड़कों को बेहतर बनाने और ग्रामीण इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने की बात कर रही है, वहीं जिले के तमाम ब्लाकों में गांव को जोडऩे के लिए सड़कें ही नहीं है। अनपरा से लगे भाट क्षेत्र में सड़क निर्माण वन विभाग द्वारा रोक दिया गया है। जिससे लोगों में आक्रोश है।
घोरावल ब्लाक में तमाम सड़कों की दयनीय हालत प्रशासन व कार्यदायी विभागों की मंशा पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। कोलियाघाट-शिल्पी-रिजूल मार्ग, औराही-मुसरधारा मार्ग, घोरावल कस्बा में शिवद्वार मार्ग, पिपरवार-खाक मार्ग, मुक्खा रोड, घोरावल-शिवद्वार मार्ग समेत इलाके के तमाम सड़कों का कोई पुरसाहाल नहीं है। इनकी दयनीय हालत देखकर राहगीर शासन प्रशासन को कोसते हैं। इनमें से अधिकांश सड़कों पर कई वर्षों से कोई काम नहीं हुआ है। गड्ढा भरने की कवायद में कुछ सड़कों पर पैचिंग का काम किया गया लेकिन घटिया होने से टिक नहीं पाया। कोलियाघाट-शिल्पी-रिजूल मार्ग पर यात्रा करना किसी एडवेंचर से कम नहीं होता। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यह सड़क पूरी तरह कच्ची है, जो सोन नद पार जनपद व मध्यप्रदेश के कई दर्जन गांवों को घोरावल से जोड़ती है। इसके निर्माण की स्वीकृति भी सपा सरकार में मिली थी लेकिन वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के चक्कर में यह मार्ग अभी भी फंसा हुआ है। शिवद्वार मार्ग का करीब 15 साल पहले नया निर्माण किया गया था परंतु इसके बाद कभी कोई काम नहीं हो पाया।। पिपरवार-खाक मार्ग का निर्माण सन 1995-96 के दौरान किया गया था। उसके बाद से यह भगवान भरोसे ही चल रहा है। करीब पांच किलोमीटर लंबी इस सड़क से पिपरवार, खाक, कनेटी, मुंगहरी, महुअरिया गांव जुड़े हुए हैं।