दिल्ली गैंगरेप मामले के नाबालिग दोषी को उसका गांव सुधरने की शर्त पर पनाह दे सकता है। अमर उजाला की टीम ने गांव में दौरा किया तो कुछ इसी तरह के संकेत मिले।
मां ने कहा कि बेटे की करतूत से परिवार के साथ गांव भी शर्मसार हुआ लेकिन अगर वह जिंदगी को सुधारना चाहता है तो वे उसकी मदद करेंगे। न्यूनतम सजा होने से परिवार वाले कुछ राहत में दिखे।
मामले में दोषी नाबालिग बदायूं जिले के एक गांव का निवासी है। इसे जुवेनाइल कोर्ट ने स्कूल की टीसी के आधार पर नाबालिग घोषित किया था।
घटना के वक्त उसकी उम्र लगभग साढ़े सत्रह साल थी। फैसले के बाद घरवालों के चेहरे भी तनाव रहित दिखे। उन्हें भी कोर्ट के फैसले की जानकारी हो चुकी थी।
उसकी मां ने कोर्ट के निर्णय पर संतोष जताया। उसने कहा कि बेटा कैसा भी सही, मां के लिए तो दुलारा होता ही है। वह तो अपने बेटे को मरा हुआ समझ चुकी थी। जब उसके जीवित होने के साथ ही उसकी करतूत का पता चला तो शर्म से सिर झुक गया। पूरे गांव का नाम उसके साथ बदनाम हुआ है। फिर भी अगर वह अपनी जिंदगी को सुधारना चाहता है तो वह लोग उसकी मदद करेंगे।
आरोपी के गांव वाले भी सजा सुनवाई की तारीख का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।