उत्तर प्रदेश में इस बार नदियों की बाढ़ ने भारी तबाही मचायी है। प्रदेश के 14 जिले बलिया, गाजीपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, मिर्जापुर, संत कबीरनगर, गोरखपुर, गोंडा, बाराबंकी, हमीरपुर, बांदा, बहराइच, लखीमपुर खीरी और बहराइच बाढ़ की मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं।
बाढ़ की विभीषिका ने फसलों को जहां भारी नुकसान पहुंचाया है वहीं जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मानसून की शुरुआत से अब तक प्रदेश के बाढ़ग्रस्त इलाकों में विभिन्न कारणों से 260 लोगों की मौतें हो चुकी हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव के लिए एनडीआरएफ व पीएसी की टीमों की मदद ली जा रही है।
गंगा का जलस्तर फाफामऊ व छतनाग इलाहाबाद, मिर्जापुर, वाराणसी, गाजीपुर व बलिया में खतरे के निशान के ऊपर है। यमुना इलाहाबाद, शारदा नदी पलियाकला, घाघरा नदी एल्गिनब्रिज व तुर्तीपार में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है।
इलाहाबाद में इतनी विकराल बाढ़ दस वर्ष बाद आई है। जलस्तर घटने के बावजूद अब तक 103 गांव और शहर के दो दर्जन से अधिक मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हैं।
संतकबीरनगर में घाघरा के कहर से धनघटा तहसील केहैंसर इलाके के लगभग सभी गांव बाढ़ में डूब गए हैं। बलरामपुर जिले में राप्ती ने पिछले एक दशक की बाढ़ का रिकार्ड तोड़ दिया है।
प्रदेश में अब तक हुईं 260 मौतों में 107 बाढ़ से, 105 अतिवृष्टि या दीवार गिरने से और 48 मौतें बिजली गिरने से हुई हैं। इस बीच 311 पशु भी मरे हैं।
वाराणसी, बलिया, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, चंदौली, मऊ, आजमगढ़ में गंगा और घाघरा ने करीब तीस साल बाद इतना रौद्र रूप दिखाया। इन सभी जिलों में 10 लाख से अधिक आबादी बाढ़ से प्रभावित है। वाराणसी शहर में 1978 के बाद इतनी भीषण बाढ़ आई है।
बुंदेलखंड और सेंट्रल यूपी में कई दिनो से लगातार बारिश होने से बड़ी संख्या में कच्चे मकान ढह रहे हैं। सबसे ज्यादा बांदा, जालौन, हमीरपुर में मकान गिरने की घटनाएं हुई हैं।
हमीरपुर में कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन पुल का एप्रोच बह जाने से पिछले 15 घंटे से महोबा सहित मध्यप्रदेश से जिले का संपर्क कट गया है।
झांसी में लगातार दो दिन हुई बारिश से मोंठ, चिरगांव, मऊरानीपुर, समथर, शाहजहांपुर, एरच, लोहागढ़, पूंछ, रानीपुर, गुरसरांय, बंगरा, बामौर के दर्जनों गांवों में फसल चौपट हो गई।