मुनिया को खो चुके कचौरा गांव ने अपनी बेटियों को बचाने के लिए खुद ही पहल की है। 26 अप्रैल को जहां मुनिया का शव रखा था, उसी जगह पर गुरुवार को एक महापंचायत का आयोजन किया गया।
महापंचायत ने मुनिया के साथ दरिंदगी करने वाले शैलेंद्र उर्फ चिंटू के परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है।
पंचों ने साफ कह दिया कि इस गांव में दरिंदों के लिए जगह नहीं है। गांव में अब न तो कोई उसके परिवार का सहयोग करेगा और न ही खेत की सिंचाई के लिए पानी देगा।
इसके साथ गांव में डीजे और रंगशाला पर भी रोक लगा दी गई है।
सुबह 9 बजे मुनिया के पिता के बाड़े में पहली बार महापंचायत बुलाई गई। अरसैना, अछनेरा, सींगना, रैपुरा, मई आदि गांवों के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।
महापंचायत में 33 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई, जिसने आपसी विचार विमर्श के बाद ये फैसला लिया। सभी ग्रामीणों ने इस पर सहमति जताई।
अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्रधान उत्तम सिंह व गुलाब सिंह ने कहा कि कचौरा गांव कंचन बाबा ने बसाया था। यहां आज तक ऐसी घटना नहीं हुई। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि फिर कोई ऐसा करने की हिमाकत न कर सके।
कैबिनेट मंत्री के प्रति ग्रामीणों में गुस्सा
महापंचायत में सत्ता पक्ष के उदासीन रवैये के प्रति बेहद गुस्सा नजर आया।
एक वक्ता ने कहा कि जिस वक्त मुनिया का अंतिम संस्कार हो रहा था, समीप के गांव बबरौद में कैबिनेट मंत्री अरिदमन सिंह स्वागत समारोह में मौजूद थे। वे कचौरा आकर पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने तक नहीं पहुंचे।
देश की राजधानी में यदि कोई घटना होती है तो देशवासी एक हो जाते हैं, मंत्री, नेता, अधिकारी सब पहुंचते हैं लेकिन इस घटना को अमर उजाला द्वारा प्रकाशित करने के बाद ही विभिन्न पार्टियों के नेता पहुंचे।
यह है मामला
25 अप्रैल की शाम आठ वर्षीय मुनिया की दुराचार के बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उसका शव दारोगा के बाड़े में कमरे की छत पर पड़ा मिला था। 27 अप्रैल को दुष्कर्म और हत्या के आरोपी शैलेंद्र उर्फ चिंटू को पुलिस ने झंडीपुर गांव से गिरफ्तार किया था।