सीतापुर। संकष्टी चतुर्थी व्रत जिसे सकट व्रत के नाम से भी जाना जाता है, यह व्रत पूजन संतान प्राप्ति के लिए भी रखा जाता है। इस दिन माताएं अपने पुत्रों की लंबी आयु के लिए यह पूजन करती हैं। शुक्रवार को यह व्रत मनाया जाएगा। इसको लेकर बाजारों में महिलाएं पूजन सामग्री खरीदती हुई नजर आईं।
आचार्य विवेक द्विवेदी ने बताया कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ कहते हैं। इसे संकष्टी चतुर्थी, वक्रतुण्डी चतुर्थी और तिलकुटा पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान के सुखी, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत कर भगवान गणेश की पूजा अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सकट चौथ के दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने से निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। संतान संबंधी सभी समस्याओं का निवारण होता है।
सकट चौथ के दिन भगवान गणेश को तिलकुट चढ़ाने का विशेष महत्व है। इस दिन तिल गुड़ से बकरा बनाया जाता हैं। जिसका पूजन किया जाता है। उसके बाद उसको काटा जाता हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चंद्रदेव की पूजा अर्चना कर अर्घ्य देने से ग्रह नक्षत्र मजबूत होते हैं। घर में सुख समृद्धि का वास होता है और दरिद्रता का नाश होता है।
पूजन मुहूर्त
चतुर्थी तिथि शुक्रवार को सुबह आठ बजकर 51 मिनट से प्रारंभ होकर 22 जनवरी शनिवार को सुबह 9.41 बजे समाप्त होगी। इस दिन निर्जला व्रत कर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा अर्चना के बाद रात को चंद्रदेव को आठ बजकर 39 मिनट पर अर्घ्य देकर पारण किया जाएगा।