घाघरा नदी पर बना प्रदेश का सबसे लंबा चहलारी घाट पुल बनकर तैयार हो गया। पुल पर रविवार को आवागमन शुरू हो गया। इस पुल के शुरू हो जाने से सीतापुर से बहराइच जाने वालों की राह आसान हो गई है।
350 करोड़ रुपये में बने 3260 मीटर लंबे इस पुल का शिलान्यास अगस्त 2006 में हुआ था। घाघरा में आने वाली बाढ़ व अन्य रुकावटों के चलते पुल को तैयार करने में 10 साल से अधिक समय लग गया।
17 अगस्त 2006 को तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने इस पुल का शिलान्यास किया था। विश्व बैंक की मदद से 350 करोड़ रुपये की लागत में बने इस पुल के निर्माण में घाघरा की लहरें समय-समय पर मुसीबत खड़ी करती रही।
चहलारी घाट पुल का निर्माण तीन हिस्सों में किया गया। 2013 में बहराइच जिले की ओर से नदी पर 870 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया जा चुका था। इस बीच नदी ने कटान शुरू कर दी। इसके बाद सीतापुर की तरफ से नदी पर सेतु निगम ने 1130 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया। कटान से नदी पुल के दोनों हिस्सों के बीच में बहने लगी।
इस वजह से पुल को पूरा करने में इंजीनियरों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। दोनों छोरों के बीच खाली 1260 मीटर पर पुल बनाने का काम कुछ दिन ठप रहा। विश्व बैंक के अधिशाषी अभियंता एसके गौतम ने बताया कि विश्व बैंक की मदद से 350 करोड़ रुपये से घाघरा पर 3260 लंबे पुल का निर्माण कराया गया है।
निर्माण पूरा होने के बाद इसे आवागमन के लिए खोल दिया गया है। यह पुल सीतापुर, लखीमपुर, बहराइच समेत आसपास के जिलों के लोगों की राह आसान करेगा। उन्होंने बताया कि चहलारी घाट का पुल प्रदेश का सबसे लंबा पुल है। इससे पहले बस्ती व अंबेडकरनगर के बीच पड़ने वाला ब्रिज ही यूपी का सबसे बड़ा पुल था। जो बस्ती-लुंबनी-दुद्धी राष्ट्रीय राजमार्ग को कलवारी-टांडा से जोड़ता है।