फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: लखनऊ के ड्राइविंग टेस्ट सेंटर पर नहीं पहुंच रहे आवेदक, पहले 275 डीएल बनते थे प्रतिदिन, घटकर रह गए 30-35

Sat, 19 Sep 2026 10:57 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला, सीतापुर

सार

लखनऊ के पहले निजी ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में आवेदकों की संख्या कम पहुंच रही है। पहले रोजाना करीब 275 स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनते थे, जबकि अब 30 से 35 ही बन रहे हैं। काकोरी स्थित सेंटर की दूरी और टेस्ट में असफल होने की आशंका को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है।
विज्ञापन
निजी ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में परमानेंट लाइसेंस के लिए टेस्ट देता जवान। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लखनऊ का पहला निजी ड्राइविंग टेस्ट सेंटर शुरू हो चुका है मगर डीएल आवेदक अभी टेस्ट के लिए सेंटर पर नहीं पहुंच रहे हैं। इस कारण एक दिन में 30 से 35 लाइसेंस ही बन रहे हैं, जबकि पहले औसतन 275 डीएल प्रतिदिन बनते थे। ऐसे में अफसरों ने ड्राइविंग टेस्ट के लिए आवेदकों की संख्या बढ़ाने पर मंथन शुरू कर दिया है।

विज्ञापन


दरअसल, लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया ऑनलाइन है। इसके लिए आवेदक को आरटीओ नहीं आना पड़ता। लेकिन परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस के लिए बायोमीट्रिक करवाने के बाद वाहन चलाने का टेस्ट देना पड़ता है। इसमें पास होने पर ही डीएल बनता है।

लखनऊ में ट्रांसपोर्टनगर व देवा रोड एआरटीओ है, जहां प्रतिदिन औसतन 275 परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनते थे। बीते 14 सितंबर को लखनऊ का पहला निजी ड्राइविंग टेस्ट सेंटर (एडीटीसी) काकोरी स्थित उदितखेड़ा में शुरू किया गया है। 
विज्ञापन


यहां परमानेंट लाइसेंस के लिए आवेदकों को टेस्ट देना अनिवार्य है। इसकी वीडियो रिकाॅर्डिंग भी होती है। लेकिन यहां अभी आवेदक पहुंच नहीं रहे हैं, जिससे ड्राइविंग टेस्ट नहीं हो रहे हैं और लखनऊ में प्रतिदिन बनने वाले डीएल की संख्या घट रही है। पहले दिन महज 32 आवेदक ही टेस्ट देने के लिए पहुंचे। इसके बाद मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार व शुक्रवार को औसतन 30 से 35 आवेदक ही ड्राइविंग टेस्ट के लिए सेंटर गए। इसमें दो व चार पहिया वाहन चालक शामिल हैं।

इसलिए नहीं पहुंच रहे आवेदक

विभागीय अधिकारी बताते हैं कि एडीटीसी की दूरी अधिक है। ट्रांसपोर्टनगर एआरटीओ से यह करीब पांच से सात किलोमीटर, जबकि देवा रोड एआरटीओ से करीब 40 किमी दूर है। ऐसे में आवेदक ड्राइविंग टेस्ट के लिए नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ड्राइविंग टेस्ट में चूकने पर फेल होने की आशंका अधिक है। हालांकि, अफसरों का कहना है कि लखनऊ में तीन और एडीटीसी खुलेंगे, जिसके बाद यह समस्या दूर हो जाएगी।

 

सेंसरयुक्त है ट्रैक, टोकन से खुलता है

सेंटर संचालक प्रमोद सिंह ने बताया कि टेस्ट के लिए पहुंचने वाले आवेदकों की गेट पर एंट्री होती है। इसके बाद कार्यालय में उन्हें टेस्टिंग ट्रैक का ड्रोन से बनाया गया वीडियो दिखाया जाता है। उनके सवालों के जवाब भी दिए जाते हैं। सिम्युलेटर की सुविधा भी है। आवेदकों को डिजिटल टोकन मिलता है, जिसे दिखाने के बाद वे सेंसरयुक्त ट्रैक पर जाते हैं। फेल होने पर आवेदकों को सात दिन बाद टेस्ट का अवसर मिलेगा। इसके लिए उन्हें दोबारा स्लाॅट लेना होगा।

 

डीएल आवेदकों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ेगी

एआरटीओ प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि एडीटीसी का शुभारंभ हाल ही में हुआ है। डीएल आवेदकों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ेगी। इसके लिए आरटीओ आने वालों को जागरूक भी किया जा रहा है। जल्द ही पूरी व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
विज्ञापन

ये हैं ड्राइविंग टेस्ट

टेस्ट भारी वाहन  हल्के वाहन
पैरलल पार्किंग 60 सेकेंड 45 सेकेंड
8 ट्रैक (आठ बनाना)  75 सेकेंड 45 सेकेंड
ग्रेडिएंट (चढ़ान)   60 सेकेंड 45 सेकेंड
रिवर्स एस (रिवर्सिंग) 120 सेकेंड 50 सेकेंड

(नोट: दो पहिया वाहन चालकों को ड्राइविंग टेस्ट के लिए 90 सेकेंड मिलेंगे।)

                       
         

                     
           
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें