सीतापुर। शहर की यातायात व्यवस्था ट्रैफिक सिग्नल के जरिये शुरू करने की कवायद तीन साल में भी पूरी नहीं हो सकी है। चौराहों पर लगी लाइटें केवल शोपीस बनकर रह गई है। इन चौराहों पर सिपाही रस्सी और डंडे के सहारे यातायात व्यवस्था संभालते हैं। अफसर एक-दूसरे की लापरवाही बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे है।
शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करीब ढाई साल पहले लालबाग चौराहे, बस स्टॉप और कोतवाली चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लाइट लगाई गई थी, जो अब सफेद हाथी साबित हो रही है। किसी भी चौराहे पर इन सिग्नल के हिसाब से यातायात व्यवस्था चलती नहीं मिलेगी। तीनों चौराहों में से दो चौराहों लालबाग और बस स्टॉप पर कर्मी रस्सी और डंडे के सहारे यातायात व्यवस्था संभाल रहे हैं। कोतवाली चौराहे पर तो यह सुविधा भी नहीं है। लोग अपने हिसाब से वाहन चलाते मिलेंगे।
यातायात विभाग का कहना है कि उसकी मजबूरी है, वह इन सिग्नल को अपने हिसाब से नहीं चला सकता है। ढाई साल पहले ही इनकी मरम्मत का जिम्मा नगर पालिका को दिया गया था जो अब तक वापस नहीं मिला है। नगर पालिका भी कहना है कि पुलिस को ये लाइटें हैंडओवर की जा चुकी हैं।
लाखों खर्च पर व्यवस्था जस की तस
ट्रैफिक सिग्नल के जरिये यातायात व्यवस्था चालू करने का सिर्फ एक ही मकसद था कि शहर का यातायात सही ढंग से संचालित हो। लोग यातायात नियमों का पालन करें। लाखों खर्च करने के बाद भी ट्रैफिक सिग्नल चालू नहीं हो सके हैं। लाइटें भी अब खराब होने लगी हैं। रस्सी के सहारे यातायात चल रहा है। ऐसे में दिनभर लोग नियमों की अनदेखी करते हुए देखे जा सकते हैं।
नगर पालिका ने नहीं कराया दुरुस्त
जब सिग्नल व्यवस्था खराब हुई थी तो उसे नगर पालिका को हैंडओवर किया गया था, जिससे उसकी मरम्मत हो सके। करीब ढाई साल हो गए हैं। अभी तक इसे नगर पालिका ने हैंडओवर नहीं किया है।
- फरीद अहमद, यातायात निरीक्षक