सीतापुर। स्वामी महेश गिरी का 111 साल की उम्र में इलाज के दौरान लखनऊ में देहावसन हो गया। वह पिछले कई दिनों से अस्वस्थ थे। गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर नैमिषारण्य में स्थित उनके पंजाब धर्मार्थ आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया।
इसके बाद दोपहर 12 बजे सीतापुर, लखीमपुर, हरदोई, पंजाब व झारखंड से आए उनके शिष्यों द्वारा आश्रम में ही उन्हे समाधि दी गई।
स्वामी जी का जन्म पड़ोसी जिला लखीमपुर के मितौली क्षेत्र के ककहरा गांव में 111 वर्ष पहले हुआ था। उन्होंने आठ वर्ष की आयु में ही सन्यास ले लिया था।
उनके शिष्यों का कहना है स्वयं अशिक्षित होते हुए भी उन्होंने पंजाब, झारखंड, कनाडा, जैसे कई प्रांतों व लखीमपुर के मोहम्मदी, औरंगाबाद, मितौली, सीतापुर के नैमिषारण्य, मछरेहटा, व पिसावां क्षेत्र के अनंतापुर, जलाईपुर जबकि हरदोई जिले के पिहानी सहित सैकड़ों इंटर, डिग्री कॉलेज, शिव मंदिरों एवं आश्रमों का निर्माण कराया।
उन्हें सम्पूर्ण रामचरित मानस कंठस्थ थी। वह कभी भी निर्माण कराए गये विद्यालयों मंदिरों एवं आश्रमों से कोई भी लाभ नहीं लेते थे।