सीतापुर। दोपहर का 12 बज रहे थे और हाइवे पर बेखौफ दौड़ रहे ओवरलोड वाहन धूल उड़ाते-डगमगाते हुए चले जा रहे थे। भारी भरकम सामान लादे ओवरलोड वाहन इस तरह से चल रहे थे कि मानो अब गिरे कि तब गिरे! दूर से उनकी चाल देखकर ऐसा लग रहा था कि कभी भी इनका नियंत्रण हट सकता है। किसी भी समय यह पलट सकते हैं। इनके पास से वाहन चालक भी गुजरते हुए डर रहे थे, लोगों को लग रहा था कि कहीं ओवरलोड सामान वाहन समेत उन पर ही न गिर पडे़। सड़क सुरक्षा सप्ताह चल रहा है। गुरुवार को इस सप्ताह का चौथा दिन था। इस सप्ताह का कितना असर जमीनी स्तर पर है, इसे जानने के लिए अमर उजाला टीम दोपहर 12 बजे कांशीराम कॉलोनी पहुंची।
टीम यहां से गुजर रहे एक ओवरलोड ट्रक के पीछे चल पड़ी, कांशीराम कॉलोनी से वैदेही वाटिका की महज छह किलोमीटर की दूरी में ओवरलोड ट्रक करीब नौ बार अनियंत्रित हुई। उस ट्रक पर इतना सामान लदा था कि एक छोर से वो झुका जा रहा था। करीब 20 मिनट के सफर में ऐसे कई वाहन निकले दिखे जो ओवरलोड थे। टीम ने कई बार ट्रक को ओवरटेक कर डिवाइडर के उस पार जाकर सामने की ओर भी फोटो खींची।
इस दौरान टीम ने कई ऐसे वाहनों को देखा जो यातायात नियमों को दरकिनार कर मनमाने तरीके से जा रहे थे। कृषि के लिए इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्टर ट्रॉली पर टेंट का सामान लदा हुआ था। इस पर भी लापरवाही का आलम यह था कि ओवरलोड ट्रॉली पर करीब 4 लोग बैठे हुए थे। एक पिकअप पर फ्रिज लदे हुए थे, पिकअप बड़ी ही धीमे-धीमे जा रही थी। फिर भी उस पर लदे सामान से उसका संतुलन बिगड़ रहा था। महज 20 मिनट के सफर में ऐसे नजारे टीम ने देखे जिसे देख कर लग रहा था कि अगर जरा सी चूक हो जाए तो न जाने कितना बड़ा हादसा हो सकता है।
लेकिन क्या परिवहन विभाग के जिले के जिम्मेदार अफसरों को को ऐसे वाहन नहीं दिखते? अगर दिखते भी हैं तो अफसर कार्रवाई करने से क्यों बचते हैं। आम दिनों में न सही लेकिन सुरक्षा सप्ताह में तो विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए। ताकि हादसों में कमी हो। फिर भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान देने के बजाय, कार्यालय में बैठकर कागजों पर ही जागरूकता अभियान चलाते जा रहे हैैं।
मौत का भी नहीं है खौफ, अभियान भी बेदम
रास्ते में कृषि कार्य करने वाली एक टैक्टर ट्रॉली दिखी। जिस पर भारी मात्रा में टेंट का सामान लदा हुआ था। ट्रॉली पर लदे सामान के ऊपर चार लोग भी बैठे थे। कैमरामैन ने जब कैमरे से फोटो खींची तो लोगों ने देखा तो लेकिन उनको कोई असर नहीं पड़ा। सड़क खराब होने के कारण कई बार झटके भी लग रहे थे, जरा सी चूक हो जाती तो कोई भी नीचे गिर सकता था, उसकी मौत भी हो सकती थी, लेकिन उनको मौत से भी कोई खौफ नहीं था।
शहर में जो जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, उसके लिए ई रिक्शे में स्पीकर बांधकर प्रचार किया जा रहा था। स्पीकर की आवाज इतनी कम थी कि पास से गुजरने वाले लोग भी न सुन सकें कि उनको किस तरह से यातायात के नियमों का पालन करना है। पास जाने पर चालक ने बताया कि इसकी बैट्री कम होने की वजह से ही इसमें आवाज नहीं आ रही है।
नहीं दिखा परिवहन विभाग का कोई अधिकारी
एआरटीओ प्रशासन माला बाजपेई ने बताया था कि महज तीन दिनों केे भीतर उन्होंने 32 वाहनों केे चालान काटे थे। इसके बावजूद भी पूरे हाइवे पर एक भी परिवहन विभाग की टीम दिखाई नहीं पड़ी, जबकि इस मार्ग पर एक कई ऐसे स्थान हैं। जहां चेकिंग अभियान चलाया जा सकता है।