महोली (सीतापुर)। जीवन के परिवर्तन का नाम सत्संग है। सत्संग जीव की मुक्ति का साधन भी है। यह बात पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर व अखिल भारतीय संत समिति के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने कठिना तट स्थित श्रीराधाकृष्ण धाम स्थित प्रज्ञानं सत्संग आश्रम में आयोजित गीता जयंती महोत्सव के पहले दिन कही।
आयोजन की शुरुआत आश्रम के महंत स्वामी प्रणवानंद सरस्वती जी ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इसके बाद उन्होंने भगवद्चर्चा करते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीताजी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती हैं। इसके बाद आश्रम के संस्थापक महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती जी ने गीताजी के तीसरे अध्याय का वर्णन करते हुए धर्म के लक्षण बताए। उन्होंने कहा कि धर्म के 10 लक्षण होते हैं, धृति, क्षमा, दम:, अस्तेय, शुद्धि, इंद्रिय निग्रह,धी:, विद्या, सत्य, अक्रोध: इन लक्षणों में से जिस मनुष्य के पास चार तक लक्षण हैं व गीताजी के ज्ञान का अधिकारी है। उन्होंने कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के लिए संत, गुरु या आचार्य के पास विनम्रता के साथ जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस जीवन में सभी को समय का अभाव है, लेकिन सत्संग के लिए सभी को समय निकालना चाहिए। कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया।