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बिना डीएम-सीडीओ के संज्ञान नहीं होगी सचिवों की बहाली

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सीतापुर। नियोक्ता सचिवों को निलंबित करने के बाद बिना किसी कठोर कार्रवाई के बहाल कर देते हैं। इसे शासकीय धनराशि के दुरुपयोग के मामले बढ़ रहे हैं। विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। निलंबन व बहाली के खेल में जिम्मेदारों की संलिप्तता का मामला जिला योजना की बैठक में प्रभारी मंत्री के समक्ष जोरशोर से उठा था।
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तब डीएम व सडीओ ने भी स्वीकार किया था कि बिना उनके संज्ञान में लाए निलंबित सचिवों का बहाल कर दिया जाता है। इस खेल को रोकने के लिए डीएम ने निर्देश दिए हैं कि बहाल करने के पूर्व उनके व सीडीओ के संज्ञान में लिखित रूप से लाया जाएगा। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिला योजना समिति की बैठक में तमाम बिन्दुओं पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया था।
डीएम अखिलेश तिवारी ने सभी जिला स्तरीय अफसरों एवं अभियंताओं को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसमें प्रमुख रूप सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई के संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम पंचायत सचिव के विरुद्ध जा कार्रवाई हो रही है, उनमें बहाली के पूर्व मुख्य विकास अधिकारी एवं जिलाधिकारी के संज्ञान में लिखित रूप में लाया जाएगा। इसके बाद बहाली की कार्रवाई की जाएगी।
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किसी जनप्रतिनिधि द्वारा शिकायत की जाती है तो उसकी गोपनीयता बनाए रखी जाए। यदि किसी कर्मचारी द्वारा गोपनीयता भंग की जाती है तो उत्तरदायित्व निर्धारित कर कार्रवाई की जाए। जिन कर्मचारियों का शासन की तबादला नीति के अनुसार समय पूर्ण हो गया है उनका पटल परिवर्तित किया जाए। ब्लाक स्तर पर सोशल सेक्टर के अधिकारी कैम्प लगाएं। इसमें जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए।
एक सचिव के विरुद्ध कार्रवाई करने, शौचालयों की जांच करने, दो सीएचसी पर एक्सरे मशीन लगाए जाने, गन्ना किसानों की समस्या जैसे सीएसआर की धनराशि आवंटित करने एवं गन्ना क्रय केन्द्रों पर गन्ना उतरवाने के नाम किसानों से धनराशि लिए समेत अन्य कई बिंदुओं पर भी संबंधित अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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