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बैंकों के चक्कर काट रहे अभिभावक, 31 हजार की धनराशि लटकी

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सीतापुर। जिले के करीब 31 हजार नौनिहाल डीबीटी का लाभ पाने से वंचित हैं। वजह है कि बैंक अधिकारी इनके खाते ठीक नहीं कर रहे हैं। परेशान अभिभावक बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं। डीएम ने भी इस पर नाराजगी जताई पर बैंकों की कार्यशैली सुधर नहीं रही है।
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परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को जूता-मोजा, स्वेटर व बैग समेत अन्य सुविधाएं दी जा रही है। प्रति बच्चा 1100 रुपये जूता-मोजा, यूनीफॉर्म, बैग व स्वेटर खरीदने को दिया जा रहा। यह धनराशि सीधे अभिभावकों के खाते में भेजी जा रही है। जिले में करीब 31 हजार बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। वजह है कि किसी का खाता आधार कार्ड से नहीं जुड़ा है तो किसी ने तीन माह से अधिक समय से खाता चालू नहीं रखा है। किसी ने खाता संख्या व आईएफसी कोड गलत दर्ज किया है।
शासन ने इन नौनिहालों की सूचना बीएसए को भेज दी थी। जिला स्तर पर इसकी जांच शिक्षकों से करवाई गई। अभिभावकों से बैंक जाकर कमियां दूर कराने को कहा गया। वहीं शिक्षकों ने भी बैंक अधिकारियों से गुहार लगाई। इसके बावजूद बैंक अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इससे इन बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। जिले में 5.74 लाख नौनिहालों को योजना का लाभ मिलना था, जिसमें करीब 5.43 लाख लाभान्वित हो चुके हैं।
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1400 बच्चे मिल चुके हैं फर्जी
डीबीटी के तहत प्रत्येक नौनिहाल को 1400 रुपये मिलने हैं। योजना के तहत आधार कार्ड के जरिए पैसा सीधे बैंक में भेजा जा रहा है। एक ही आधार कार्ड नंबर से एक से दो विद्यालयों में नौनिहालों ने आवेदन कर दिए थे। जिले में करीब 1400 बच्चे ऐसेे थे। जिनके आवेदन दो जिले में हुए थे। इस पर विभाग ने इन सभी को लाभ देने से वंचित कर दिया है।
लिखा गया है पत्र
बैंकों द्वारा खातों को सही करने में देरी की जा रही है। इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी गई थी। जिलाधिकारी ने बैंक अधिकारियों को जल्द ही कमियां दूर करने के लिए पत्र लिखा गया है।
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- अजीत कुमार, बीएसए
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