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जब पांच को काटे कुत्ता, तभी लगेगा इंजेक्शन

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सीतापुर। एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए चार केसों का फेर मरीजों के लिए मुसीबत बन रहा है। इसके चक्कर में मरीजों को जेब अधिक ढीली करनी पड़ रही है। करीब दो हजार रूपये खर्च करके वह इंजेक्शन लगवा पा रहे हैं। अगर वे यह रुपये खर्च नहीं कर पाते हैं तो उन्हें जिला अस्पताल तक की लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे मरीज काफी परेशान हो रहे हैं।
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कुत्तों के काटने पर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। यह इंजेक्शन जिले की सभी सीएचसी व जिला अस्पताल में मौजूद है। लेकिन ग्रामीण इलाके में स्थित सीएचसी पर यह इंजेक्शन लगवाना मरीजों के लिए मुसीबत बन रहा है। कारण यह है एक वॉयल में पांच डोज होती है। एक बार वॉयल खोलने के बाद पांच लोगों को करीब दो घंटे के अंदर इंजेक्शन लग जानी चाहिए। लेकिन जब मरीज सीएचसी पर पहुंचते हैं तो उन्हें अन्य चार लोगों का इंतजार करना पड़ता है।
अगर यह लोग वर्किंग समय में नहीं आते है तो मरीजों को अस्पताल से वापस कर दिया जाता है। अगले दिन आने के लिए बोल दिया जाता है। ऐसे में मरीजों के सामने प्राइवेट क्लीनिक में इंजेक्शन लगवाने का विकल्प बचता है। इसके लिए उन्हें अपनी जेब बहुत ढीली करनी पड़ रही है।
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एंटी रैबीज का इंजेक्शन सरकारी अस्पतालों में बिना किसी शुल्क के लगाया जाता है। वहीं प्राइवेट क्लीनिक में एक इंजेक्शन करीब चार सौ रूपये का पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है एक मरीज को पांच इंजेक्शन लगवाने पड़ते है। एक इंजेक्शन चार सौ का मिलता है तो उसे पूरा कोर्स पूरा करने के लिए करीब दो हजार रूपये खर्च करने पड़ते हैं।
सीएचसी एलिया के चिकित्सक डॉ. सुमित शुक्ला का कहना है कि डाग बाइट घाव को किसी अच्छे एंटीबायोटिक साबुन से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। कुछ देर बाद टिटनेस का टीका अवश्य लगवा लेना चाहिए। इससे रैबीज का प्रभाव कम हो जाता है। निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र पर जाकर एंटी रैबीज की संपूर्ण डोज लेना अति आवश्यक है। किसी कारणवश अगर डोज अगले दिन नहीं लग पाती है तो भी जल्द से जल्द टीका लगवाना आवश्यक है।
डॉ. गौरव मिश्रा का कहना है जिस कुत्ते ने आपको काटा है तो उसकी 11 दिन तक निगरानी की जा सकती है। अगर कुत्ते की मौत 11 दिन के अंदर स्वाभाविक रूप से हो जाती है तो इसका मतलब यह होता है उसके अंदर रैबीज मौजूद था। इसी वजह से उसकी मौत हुई है। इन हालातों में मरीजों को इंजेक्शन की संख्या बढ़ा दी जाती है। ऐसे मरीजों को शून्य, तीन, सात, 14, 28 व 90 दिन के अंतराल पर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है।
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