सीतापुर। परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों को दिए जाने वाले दोपहर के भोजन में खेल हो रहा है। सुबह बच्चों के स्कूल आने पर हाजिरी चढ़ाने का निर्देश है, लेकिन शिक्षक छुट्टी के समय हाजिरी चढ़ा रहे हैं। इससे वह रजिस्टर पर अधिक छात्र संख्या चढ़ाकर बच्चों के निवाले पर डाका डाल रहे हैं। भोजन में ब्रांडेड मसालों के बजाए गुणवत्ताहीन मसालों का प्रयोग किया जा रहा है।
विद्यालयों में नौनिहालों को परोसे जाने वाले एमडीएम की हकीकत परखने के लिए अमर उजाला टीम ने शनिवार को जिले के विद्यालयों की रियलटी देखी। जिसमें कई जगहों पर हैरान करने वाले मामले देखने को मिले तो कई जगहों पर सही तरीके से भोजन बनते हुए भी मिला। सबसे चौंकाने वाला मामला इमलिया सुल्तानपुर विद्यालय में देखने को मिला। विद्यालय का आधा समय बीत गया था, लेकिन एमडीएम रजिस्टर पर बच्चों की उपस्थिति नहीं चढ़ाई गई थी।
जब टीम विद्यालय पहुंची तो मैडल जल्दबाजी में हाजिरी चढ़ाने लगी। शिक्षकों का कहना है कि हाजिरी देरी से चढ़ाने का मतलब है, हाजिरी में ही खेल करना। जब विद्यालय बंद होने वाला होता था, उस समय हाजिरी चढ़ाकर विद्यालय बंद कर दिया जाता है। इससे कोई अफसर उस दिन विद्यालय चेक नहीं कर सकता है। इससे उपस्थित नौनिहालों की संख्या बढ़ा दी जाती है।
बढ़े हुए छात्र संख्या का राशन व खर्च हजम कर लिया जाता है। अगर सुबह के समय हाजिरी चढ़ा देंगे तो कोई विद्यालय चेक करने आ जाएगा तो यह गड़बड़ी पकड़ में आ जाएगी। यह खेल जिले के कई विद्यालयों में हो रहा है। कई विद्यालयों में हैंडपंप खराब मिले। इससे नौनिहालों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो रहा है। विद्यालयों में सफाई का अभाव दिखा। शिक्षक से लेकर नौनिहाल बिना मास्क के ही मिले। कई विद्यालयों में गुणवत्ता के विपरीत भोजन वितरित होते मिला।
जांच करवाकर होगी कार्रवाई
नौनिहालों को एमडीएम दिया जा रहा है। अगर किसी विद्यालय में कोई गड़बड़ी की जा रही है तो उसकी जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
अजीत कुमार, बीएसए
कैमरा देख भरने लगी हाजिरी
एलिया विकासखंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय इमलिया सुल्तानपुर में शनिवार को एमडीएम बनाया जा रहा था। मगर कितने बच्चों का खाना बन रहा है, यह शिक्षिका को भी नहीं मालूम था। टीम पहुंचने पर शिक्षिका ने उपस्थिति पंजिका पर बच्चों की हाजिरी भरनी शुरू कर दी। यह हाजिरी सुबह के समय भरनी होती है। शिक्षिका ने बताया कि 352 बच्चे पंजीकृत हैं। शनिवार को 134 बच्चे आए है। जब बच्चों की रियलटी देखी गई तो महज 115 बच्चे ही मिले। एमडीएम बनने के लिए जो सामग्री प्रयोग की जा रही थी, उसमें भी मानकों की धज्जियां उड़ रही थी। सब्जी बच्चों की संख्या के अनुसार पर्याप्त नहीं थी।
पानी पीने घर जाते बच्चे
पिसावां विकासखंड के पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिसावां में शनिवार को मीनू के अनुसार सब्जी चावल बन रहा था। बच्चे जमीन पर बैठकर खाना खा रहे थे। यहां पर सफाई का अभाव दिखा। लंच के समय कुछ बच्चे घर जाते दिखाई दिए। जब उनसे पूछा घर क्यों जा रहे हो, क्या स्कूल में छुट्टी हो गई है तो बोले नहीं पानी पीने घर जा रहा है। स्कूल का नल खराब है। प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी ने बताया, विद्यालय में 283 बच्चे पंजीकृत है। हैंडपंप खराब होने से बच्चों से लेकर अध्यापक व रसोइयों को परेशानी हो रही है।
कोविड प्रोटोकॉल की अनदेखी
परिषदीय विद्यालयों को कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ रही है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय इमलिया सुल्तानपुर बीआरसी परिसर में ही बना हुआ है। यहां पर बीईओ हर समय मौजूद रहते है। यहां पर 100 से अधिक बच्चे मौजूद मिले। वह सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे थे। जबकि छात्र संख्या अधिक होने के बावजूद एक ही पाली में विद्यालय का संचालन होते मिला। बीईओ उमेश कुमार गौतम ने बताया कि 100 से ज्यादा बच्चों के आने पर दो पालियों में कक्षाएं संचालित की जाएगी।