खैराबाद। एपीटीसी कमांडेंट के फॉलोअर शैलेंद्र की मौत के मामले में आरोपियों पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने सहित अन्य मांगों को लेकर परिजनों व ग्रामीणों ने सांसद राकेश राठौर की अगुवाई में 14 घंटे तक शव रखकर प्रदर्शन किया।
बृहस्पतिवार को मौके पर पहुंचे पुलिस प्रशासन के अफसरों ने तीन अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने के साथ परिजनों को संविदा पर दो लोगों को नौकरी, आवास, भूमि का पट्टा, एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता, पूरे मामले की निष्पक्ष जांचकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद परिजन धरना खत्म कर मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हुए।
इलाके के राजापुर चिलवारा निवासी शैलेंद्र पाल (25) की मंगलवार को विषाक्त पदार्थ खाने से मौत हो गई थी। बुधवार को उनकी पत्नी सरिता पाल ने एपीटीसी कमांडेट पर पति को प्रताड़ित करने व आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। उन्होंने आरोपी कमांडेट को निलंबित कर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।
बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग की थी। देर रात 9 बजे सांसद राकेश राठौर के नेतृत्व में खैराबाद में धरना शुरू हो गया। परिजनों ने कार्रवाई न होने तक शव का अंतिम संस्कार करने से भी इन्कार कर दिया था।
तेज बारिश के बाद भी सांसद सहित परिजन व ग्रामीण धरने पर बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों को समझाने के लिए बृहस्पतिवार को सुबह एएसपी उत्तरी आलोक सिंह, उपजिलाधिकारी सदर, क्षेत्राधिकारी सिटी कपूर कुमार मौके पर पहुंचे।
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चोरी के मामले में प्रताड़ित करने का आरोप
परिजनों के अनुसार शैलेंद्र पाल पिछले एक वर्ष से एपीटीसी में कमांडेंट के साथ थे। आरोप है कि 25 जून को कमांडेंट के आवास पर हुई चोरी की घटना के बाद शैलेंद्र को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। इस कारण मानसिक तनाव से परेशान होकर उन्होंने 13 जुलाई को विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। मृतक के बड़े भाई प्रदीप पाल ने बताया कि शैलेंद्र बेहद डरा हुआ था। उसने कहा था कि अब वह जी नहीं पाएगा, कुछ कर लेगा।
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आखिरी बार आपको देखने आया हूं...
मृतक के पिता रामनाथ के अनुसार 13 जुलाई को विषाक्त पदार्थ का सेवन करने के बाद शैलेंद्र घर आए थे। उन्होंने अपने पिता से कहा कि पिताजी, आखिरी बार आपको देखने आया हूं। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ गई और वह कुछ बोल नहीं सके, परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पिता ने बताया कि अगर उन्हें अंदेशा होता कि नौकरी के कारण बेटे की जान चली जाएगी तो वे उसे कभी काम करने नहीं भेजते। शैलेंद्र अपने परिवार का सबसे छोटे और लाडले थे। परिवार में बड़े भाई प्रदीप पाल, माता सुषमा देवी, पिता रामनाथ, पत्नी सरिता और तीन वर्षीय पुत्र तुषार हैं। उसकी मौत से पूरे परिवार में मातम पसरा है।
कांग्रेस ने बताया पुलिसिया तानाशाही
मामले में इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी ने संज्ञान लिया। पार्टी ने फेसबुक पेज से जानकारी साझा करते हुए कहा कि चोरी के झूठे आरोप में कमांडेंट के लोगों ने शैलेंद्र को पीटा। मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर ही उसने विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।