संदना। किसान को निवाला बनाने वाला बाघ इलाके में लगातार चहलकदमी कर रहा है। बृहस्पतिवार को घटनास्थल से करीब तीन किमी दूर गेंधरिया गांव के पास उसके ताजा पगचिह्न मिले। वन विभाग ने उसको पकड़ने के लिए घेराबंदी शुरू कर दी है। पिंजरा व ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। कमांड सेंटर सक्रिय कर दिया गया है। बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के लिए टीम पहुंच गई है।
संदना क्षेत्र के रसुलवा मजरा मधवापुर निवासी कमल किशोर (52) की बुधवार को बाघ के हमले में मौत हो गई थी। उनके परिजनों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करते हुए पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था। आरोप था कि एक माह से बाघ इलाके में मौजूद है। एक बकरी और वनरोज का शिकार भी बाघ ने किया। इसके बाद भी वन विभाग ने बाघ को पकड़ने की कोई कवायद नहीं की।
काफी समझाने पर लोग माने, तब शव को पुलिस पोस्टमार्टम के लिए भेज सकी थी। घटना के दूसरे दिन वन विभाग ने बाघ को पकड़ने का काम शुरू कर दिया है। रसुलवा में घटनास्थल के पास पिंजरा लगाया गया है। पिंजरे में बकरी बांधी गई है। आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
मधवापुर के पंचायत भवन में कमांड सेंटर बनाया गया है। कमांड सेंटर से 24 घंटे निगरानी के लिए शिफ्टवार टीमें तैनात की गई हैं। दुधवा के विशेषज्ञ डॉ. दीपक ने कमांड सेंटर में डेरा डाल दिया है। परमिशन मिलने के बाद बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के लिए टीम भी गांव पहुंच गई है।
बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए मिश्रिख, महोली, गोंदलामऊ और मछरेहटा रेंज की टीमें लगाई गई हैं। इलाके में बाघ की दहशत लगातार बढ़ती जा रही है। खेतों की ओर जाने की लोग हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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जिले में 11 माह बाद फिर बाघ की दहशत
महोली वन रेंज के नरनी गांव में अगस्त 2025 को बाघ ने किसान सौरभ दीक्षित को निवाला बनाया था। वन विभाग की तमाम कवायदों के बाद सितंबर में एक बाघिन व अक्तूबर में बाघ पकड़ा गया था। उस समय करीब ढाई माह तक बाघ की दहशत थी। करीब 11 माह बाद जिले में एक बार फिर बाघ ने किसान पर हमला कर दहशत फैला दी है।
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बड़े बेटे ने पिता को दी मुखाग्नि
बाघ के हमले में जान गंवाने वाले किसान कमल किशोर का शव पोस्टमार्टम के बाद देर रात पहुंचा तो गांव में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। बृहस्पतिवार को पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में किसान का अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के बड़े बेटे संदीप ने पिता को मुखाग्नि दी। बाघ के हमले में जान गंवाने वाले किसान कमल किशोर के परिवार की जीविका खेती पर निर्भर है। उसके परिवार में तीन बेटियां और दो बेटे हैं। एक बेटे और एक बेटी का विवाह हो चुका है। मुखिया की मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी गहरा गया है।
बाघ की दहशत से ठप हुई खेती-किसानी
इस समय धान की रोपाई चल रही है। लेकिन बाघ की दहशत से किसान खेतों की ओर नहीं जा रहे हैं। लिहाजा, मधवापुर व रसुलवा समेत आसपास के कई गांवों में खेती-किसानी ठप हो गई है। मधवापुर के किसान राजा ने बताया कि धान की रोपाई करानी है, लेकिन बाघ की दहशत के कारण मजदूर खेतों में काम करने से मना कर रहे हैं। खेतों में सन्नाटा पसरा है।
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लोकेशन पता लगाने में जुटी टीमें
बाघ को ट्रैंकुलाइज करने की परमिशन मिल गई है। उसकी लोकेशन पता लगाने में टीमें जुटी हुई हैं। बारिश के कारण लोकेशन ट्रैस करने में समस्या आ रही है।
- नवीन खंडेलवाल, डीएफओ