जिला अस्पताल
समय 12:15 बजे
जिला अस्पताल की ओपीडी में कुछ मरीज लाइन में लग थे तो कुछ इधर-उधर खड़े थे। कुछेक के चेहरे पर मास्क था, बाकी बिना मास्क के ही थे। जिन्होंने मास्क लगा भी रखा था, वह भी सिर्फ दिखावे के तौर पर। मास्क मुंह और नाक के नीचे लटक रहा था। शारीरिक दूरी भी कहीं नजर नहीं आ रही थी। सभी एक-दूसरे से चिपके हुए खड़े थे। पैथोलॉजी के बाहर भी लोग बिना मास्क के झुंड लगाए बैठे थे।
सीन-2
महिला अस्पताल
समय 12:45 बजे
महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर महिलाएं और पुरुष बिना मास्क के ही खड़े थे। सोशल डिस्टेंसिंग का अता पता ही नहीं था। कुर्सियों पर एक पास ही लोग सटकर बैठे हुए थे। कई लोगों ने मास्क नहीं लगा रखा था। ये लोग मुंह पर हाथ रखकर दिखावा कर रहे थे। परिसर में अधिक भीड़ तो नहीं थी, लेकिन जो भी लोग थे, उनके मास्क भी गायब थे और एक ही पास में बैठे थे।
सीन-3
लालबाग बाजार
समय 1:00 बजे
शहर के मुख्य बाजार लालबाग की बुधवार की तस्वीर तो परेशान करने वाली थी। लालबाग चौराहे से लेकर घंटाघर तक लोगों से सड़क खचाखच भरी थी। लोगों ने मास्क नहीं लगा रखा था। सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रहीं थी। दुकानों पर भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा था। दुकानदार से लेकर खरीदार तक बिना मास्क के थे। ठेले पर भी बिना मास्क के ही लोग खरीदारी में मशगूल थे।
सीन-4
रोडवेज बस स्टॉप
समय 1:30 बजे
शहर के रोडवेज बस स्टॉप पर कोरोना प्रोटोकाल की बात करना ही बेमानी है। बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के लोग एक ही लाइन में कुर्सियों पर बैठे थे। सैनिटाइजर की कोई व्यवस्था नहीं है। पहलेे बनाई गई कोविड हेल्प डेस्क भी अब गायब दिखी। परिसर में लोग बेरोक टोक आ जा रहे थे। कोई किसी को मना करने वाला नहीं था। यहां तक कि रोडवेज के कर्मचारी भी बिना मास्क के थे। रोडवेज चालक और कंडक्टर भी मास्क नहीं लगाए दिखे।
सीन-5
इंडियन बैंक सिविल लाइंस
समय 2:35 बजे
शहर की सिविल लाइंस स्थित इंडियन बैंक की मुख्य शाखा का हाल जानने टीम पहुंचती है तो वहां बाहर खड़ा गार्ड कैमरा अंदर ले जाने के लिए मना करता है। वह नियम-कानून का पाठ पढ़ाने लगाता है, लेकिन बैंक के अंदर कोरोना प्रोटोकाल के नियमों की जो धज्जियां उड़ रही थीं, उन पर गार्ड बात करने को तैयार नहीं था। बैंक के अंदर लोग बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के थे। कैश काउंटर के सामने बिना मास्क के ही लोग थे।
संवाद न्यूज एजेंसी
सीतापुर। जिले में कोरोना का कहर भले ही कम है, लेकिन गैर राज्यों में संक्रमण के तेजी से फैलने से हरकत में आई योगी सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है। जिले में अलर्ट का कोई भी असर नहीं दिखाई पड़ रहा है। लोगों की लापरवाही हर कदम पर देखी जा सकती हैं। कहीं भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है। ऐसे में ये लापरवाही कोरोना संक्रमण की चेन को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
जिले में कोरोना के मामले कम जरूर हुए हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि कोरोना का पूरी तरह से खात्मा हो गया है। अब भी मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है। कोरोना संक्रमितों की मौत भी हो रही है, पर लोग मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भूल सा गए हैं। लापरवाही ये बताती है कि लोगों में कोरोना अब कोई खौफ नहीं रह गया है, लेकिन इस संक्रमण की दहशत उन परिवारों से पूछिए, जिनके अपनों को इस वायरस ने उनसे दूर कर दिया।
प्रधानमंत्री के उस मंत्र को भी जिले के लोगों ने भुला सा दिया है, जिसमें उन्होंने दो गज दूरी, मास्क है जरूरी का संदेश लोगों को कोरोना से बचाव के लिए दिया था। महाराष्ट्र, केरल, पंजाब आदि राज्यों में कोरोना ने फिर से पलटवार किया है, इससे वहां हड़कंप मचा हुआ है। कई स्थानों पर दोबारा लॉकडाउन लगा दिया गया है। खतरे की आहत को भांपते हुए योगी सरकार ने भी सोमवार को सूबे में अलर्ट जारी कर इन राज्यों से आने वालों पर नजर रखने के आदेश दिए हैं। लेकिन सरकार के आदेश और अलर्ट का जिले में कोई असर नहीं है।
ये लापरवाही बुधवार को अमर उजाला टीम की पड़ताल में सामने आई है। टीम ने शहर के सार्वजनिक स्थानों जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, बस स्टॉप, बाजार, बैंक पहुंचकर हालात देखे, जो डरावने हैं। किसी सभी स्थान पर लोग मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते नजर नहीं आए। कुछेक लोग मास्क लगाए मिले, लेकिन सामाजिक दूरी का किसी को भी ख्याल नहीं था। जिम्मेदार भी इसको लेकर गंभीर नहीं है।
कोरोना संक्रमण के मामले कम हुए हैं, लेकिन खतरा अब भी बरकरार है। वायरस का अभी पूरी तरह से खात्मा नहीं हुआ है, लेकिन लोग लापरवाही बरत रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर भी लोग मास्क और शारीरिक दूरी का ध्यान नहीं रख रहे हैं। ये लापरवाही मुसीबत खड़ा सकती है। लोगों से अपील है कि नियमों का पालन कर खुद और परिवार को सुरक्षित रखें। गैैर राज्यों से आने वालों पर नजर रखने के लिए अभी कोई लिखित आदेश नहीं आया है। पत्र आते ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- डॉ. पीके सिंह, एसीएमओ