एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 12 की छात्रा प्रतिभा आधार कार्ड में संशोधन करवाने उप डाकघर पहुंची थी। प्रतिभा ने बताया कि स्कूल में वजीफा का फार्म ऑनलाइन करवाना है। आधार में जन्मतिथि गलत हो गई है। करीब एक माह से निरंतर पिता के साथ आ रही हूं। कई बार दौड़ने के बाद भी संशोधन नहीं हो पाया है। इसके चलते मुझे मिलने वाली करीब तीन हजार रुपये की स्कॉलरशिप अटकी हुई है।
आवास का नहीं मिल पा रहा लाभ
बाढ़ में नन्हकी का घर कटान की भेंट चढ़ गया था। इसके बाद से वह तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। 75 साल की नन्हकी ने बताया कि आवास के लिए आवेदन किया है, लेकिन आधार में नाम कुछ गलत है। इसके कारण पिछले वर्ष भी पैसा नहीं मिला था। कई बार चक्कर काट चुकी हूं, लेकिन हर बार लौटना पड़ा। लंबी लाइन में खड़े होना मुश्किल है। दूसरा आधार केंद्र होता तो भीड़ कम होती और आसानी से काम हो जाता।
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। विकास खंड क्षेत्र में आधार कार्ड बनवाने के लिए उप डाकघर में सिर्फ एक केंद्र संचालित है। करीब साढ़े चार लाख की आबादी आधार बनवाने के लिए एकमात्र आधार केंद्र पर निर्भर है। इसके चलते महीनों तक चक्कर लगाने के बाद भी लोगों के आधार नहीं बन पा रहे हैं। संशोधन कराना भी बेहद कठिन है। इससे किसी को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा तो किसी का अन्य कोई जरूरी काम अटका है। लोगों ने आधार केंद्र की संख्या बढ़ाए जाने की मांग की है।
दरअसल, प्रारंभिक चरण में आधार बनवाने के नियम व साक्ष्यों में अत्यंत शिथिलता के कारण नाम, पिता के नाम सहित सबसे बड़ी गड़बड़ी जन्मतिथि में हुई है। आज जब सभी जरूरी कामों में आधार की अनिवार्यता के साथ प्रविष्टियों की एकरूपता भी आवश्यक हो गई है, ऐसे में ज्यादातर आधार संशोधन की श्रेणी में आ गए हैं। इस वर्ष आधार बनवाने व संशोधन कराने के लिए सरकार ने सख्त नियम बना दिए।
ऐसे में सबसे बड़ी समस्या स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को हो रही है। संशोधन में स्कूल के रिकॉर्ड न माने जाने से भी समस्याएं बढ़ गई हैं। क्षेत्र में आम लोगों के लिए उप डाकघर में संचालित सिर्फ एक ही आधार केंद्र पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की सुबह से ही भीड़ लग जाती है। इनमें से अधिकतम 50 से 60 लोगों के ही आधार बनाए या संशोधित किए जाते हैं।
करीब दो माह से दौड़ रही 55 साल की अंजलि ने बताया कि बहुत सुबह ही लोग लाइन में लग जाते हैं। हम तटबंध से आते हैं। देर हो जाती है। सरकार ने जब आधार को इतना ही जरूरी कर दिया है तो यहां और सेंटर बनाए जाने चाहिए। करीब एक माह से लाइन में लगकर वापस जा रहे है। वहीं, 65 साल के बुजुर्ग नरेश ने बताया कि वह शुकुलपुरवा से आते हैं। इतनी लंबी लाइन में पूरे दिन खड़े नहीं हो पाते हैं। इन्होंने भी लाखों की आबादी के लिए एक केंद्र को नाकाफी बताया। नागरिकों ने दूसरा आधार केंद्र खोलने की मांग की है।
दूसरा आधार केंद्र खुलवाने का होगा प्रयास
रामपुर मथुरा में एक आधार केंद्र होने से जो समस्या आ रही है, उसके समाधान के लिए दूसरा आधार केंद्र खुलवाने का प्रयास किया जाएगा।
- शिखा शुक्ला, एसडीएम महमूदाबाद